Shahadat Ko Salam : कड़ाके की ठंड और तपती गर्मी के बीच जब सरहदों पर देश के सैनिक मुस्तैदी से गश्त लगाते हैं, तभी देशवासी सुरक्षित और चैन की नींद सो पाते हैं। ऐसा ही एक प्रेरणादायी उदाहरण रतनगढ़ तहसील के गांव गौरीसर के वीर सपूत शहीद राजेंद्र कुमार नैण का है।
चूरू। कड़ाके की ठंड और तपती गर्मी के बीच जब सरहदों पर देश के सैनिक मुस्तैदी से गश्त लगाते हैं, तभी देशवासी सुरक्षित और चैन की नींद सो पाते हैं। ऐसा ही एक प्रेरणादायी उदाहरण रतनगढ़ तहसील के गांव गौरीसर के वीर सपूत शहीद राजेंद्र कुमार नैण का है।
शहीद राजेंद्र कुमार नैन चयन 3 जनवरी 2015 को सीआरपीएफ में हुआ था। उस समय उनकी आयु 26 वर्ष थी। 31 दिसंबर 2017 को पुलवामा (श्रीनगर) में हुए आतंकी हमले के दौरान उन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। शहीद अपने पीछे पत्नी, दो वर्ष की बेटी और माता-पिता को छोड़ गए।
शहादत की खबर से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। वीरांगना पत्नी प्रियंका देवी सदमे में आ गईं थी। माता-पिता और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो रहा था। पूरा गांव गमगीन था। इस कठिन समय में राज्य व केंद्र सरकार का सहयोग सराहनीय रहा। वर्तमान में वीरांगना प्रियंका देवी सरकारी सेवा में कार्यरत हैं, जिससे परिवार के भरण-पोषण में राहत मिली।
शहीद परिवार की मांग है कि अभी तक शहीद राजेंद्र कुमार नैण के नाम पर विद्यालय का नामकरण नहीं किया गया है, जबकि शहीद परिवार बालिका विद्यालय खुलवाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।
भारत सरकार ने शहीद राजेंद्र कुमार नैण के सर्वोच्च बलिदान के लिए उनके परिवार को कीर्ति चक्र प्रदान कर सम्मानित किया। यह सम्मान राष्ट्रपति भवन में उनकी पत्नी प्रियंका देवी और माता सावित्री देवी ने प्राप्त किया। इसके साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की ओर से आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई।
31 दिसंबर 2018 से प्रत्येक वर्ष गांव स्थित शहीद स्मारक पर 'शहादत को सलाम, कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इस अवसर पर रक्तदान, स्वेटर वितरण, फल वितरण और पुस्तक वितरण जैसे समाजसेवा व राष्ट्रभक्ति से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, ताकि आने वाली पीढ़ी शहीद के बलिदान से प्रेरणा ले सके।