
सरदारशहर/चूरू.
विज्ञान केन्द्र गांधी विद्या मंदिर के निर्देशन में नेहा सैनी व दीपिका बोचीवाल ने आतंकवादियों का पता लगाने के लिए एक रोबोट बनाया है। जिसकी राज्य एवं राष्ट्रीय प्रदर्शियों में सराहना हो रही है। आज के वैज्ञानिक युग में विभिन्न प्रकार के कार्यो को संपन्न करने के लिए विभिन्न प्रकार के रोबोट बनाए जा रहे है। लेकिन सरदारशहर की बेटियों ने ऐसा रोबोट बनाया है जो पहाड़ों पर पर चलकर आतंकवादियों का पता लगाएगा।
छात्राओं ने यह रोबोट अत्यंत सरल तथा कम लागत से बनाया है। हमारे देश में विभिन्न प्रकार की आतंकी नक्सली घटनाओं के समाधान में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यह एक प्रकार से बहुमंजिल इमारत तथा पहाड़ी क्षेत्रों एवं जंगलों में आतंकवादियों को तलाशने के लिए इसका उपयोग हो सकता है। इसके साथ लगा हुआ वायरलैस कैमरा तथा कंट्रोलरूम में लगा मॉनिटर इसके सामने आने वाला प्रत्येक दृश्य व वस्तु दिखाता रहता है। जिससे सुरक्षा कर्मचारियों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
यह रोबोट कम्प्यूटर अथवा रीमोट कंट्रोल से चलाए जाते है। सभी प्रकार के रोबोट में अत्याधिक जटिल पूर्जो तथा लाखों रूपयों का खर्चा होता है। अधिक देशों में छात्रों द्वारा बनाए जाने वाले प्रोजेक्ट अधिक कीमती होने के बावजूद विशेष उपयोगी नहीं होते। परन्तु नामी कंपनियों के द्वारा बनाए गए रोबोट करोड़ों की लागत से बनते है और उनका उपयोग चिकित्सा के क्षेत्र तथा उद्योगों में होता है।
आवश्यक सामग्री
वायरलैस कैमरा, मॉनिटर, रिसिवर, गेयरबॉक्स, डीसी विद्युत मोटर, वैग लोहे की चद्दर, लकड़ी, नट, बोल्ट, प्लाई, पाइप, बैटरी, सुचालक तार, सीढियों का नमूना और स्विच।
इस प्रोजेक्ट से हमें निम्न सिद्धान्तों की जानकारी होती है
विद्युत मोटर का सिद्धान्त, सामान्य विद्युतीय परिपथ का ज्ञान, विद्युत चुम्बकीय तरंगों के प्रसारण एवं ग्रहण करने का सिद्धान्त
कार्य प्रणाली
इस प्रोजेक्ट में लकड़ी के एक आयताकार प्लेटफार्म और एक गियरबॉक्स व्यवस्थित किया गया है। इसके संचालन के लिए डीसी की विद्युत मोटर लगाई गई है। गियरबॉक्स के अन्तिम दूरी पर चित्र में दिखाएं अनुसार पहिए व्यवस्थित किए गए हैं। जब विद्युत मोटर में बेटरी से विद्युत प्रवचाहित की जाती है तो इस प्रकार धूमते है कि अपनी बनावट के कारण एक सीढी से दूसरी सीढी पर चढ़ जाते है। इस प्लेट पर लगा हुआ वायरलैस कैमरा सामने के दृश्य के अपने एन्टीना द्वारा वायुमण्डल में प्रसारित करता है। यह प्रसारण कि कंट्रोल रूम में स्थित उसी घर के एंटीने में पहुंचकर मोनिटर में दृश्य उत्पन्न करती है। इस प्रकार यह सीढ़ी रोबोट उबड़ खाबड़ जगहों तथा सीढियों पर किसी इमारत में छुपे हुए आतंकवादियों का पता देता है।
खास बात यह है कि जो कार्य व्यक्तियों के द्वारा किया जाता है वह रोबोट के द्वारा किया जा सकता है। इससे जन हानि नहीं होगी। यह अत्यंत कम लागत से बनाया जा सकता है। इसका संचालन तथा रखरखाव अत्यंत कम हैै। इसे दुर्गम छुपी हुई जगहों पर भेजा जा सकता हैै। मशीनों के द्वारा काम होने से जन हानि नहीं होती, इसे दूर से नियंत्रण किया जा सकता है।