क्रिकेट के इतिहास में ऐसा दूसरी बार हुआ, जब बिना बेल्स के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच खेला गया हो।
मैनचेस्टर : ऑस्ट्रेलिया ( Australia cricket team ) और इंग्लैंड ( England cricket team ) के बीच चल रहे एशेज सीरीज के चौथे टेस्ट में सिर्फ 44 ओवर ही फेंके गए थे कि मौसम ने ठान लिया कि मैच नहीं होने देंगे। हवाएं काफी तेज चलने लगी। इतनी तेज की हर थोड़ी देर में से बेल्स गिर जा रहे थे। लेकिन अंपायरों ने भी तय कर लिया था कि वह मैच रोकेंगे नहीं और ऐसा निर्णय ले लिया, जो शायद ही पहले कभी देखने को मिला हो। इसके बावजूद अंपायरों ने मैच जारी रखने का निर्णय लिया और तय किया कि बिना बेल्स के ही मैच जारी रहेगा।
इस नियम के तहत लिया फैसला
क्रिकेट में आपातकालीन परिस्थितियों के लिए कुछ नियम बनाए गए हैं। अंपायरों ने उसी का प्रयोग कर यह निर्णय लिया। नियम 8.5 के अनुसार अंपायर्स के पास ये अधिकार होता है कि अगर उसे यह लग रहा है कि बेल्स मैच में बाधा डाल रही है तो वह बेल्स हटाकर मैच करवाने का निर्णय ले सकते हैं। इसी नियम का प्रयोग कर दोनों अंपायरों ने आपस में सलाह-मशवरा कर बेल्स हटाकर मैच जारी रखने का निर्णय लिया। इस नियम के तहत जैसे ही मौसम सही होता है, बेल्स वापस विकेट के ऊपर लगाना होता है। बता दें कि बार-बार बेल्स गिरने पर इंग्लैंड के तेज गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड ने आपत्ति जताई। इसके बाद खेल जारी रखने की यह युक्ति अंपायरों ने निकाली। हवा थोड़ी-सी कम हुई तो अंपायरों ने थोड़ी भारी बेल्स मंगाकर वापस विकेट पर लगा दी। हाल-फिलहाल में इसका एक बार प्रयोग हो चुका है। साल 2017 में अफगानिस्तान और वेस्टइंडीज के बीच इसी नियम के तहत मैच खेला गया था।
ऐसे में रन आउट के लिए यह है नियम
इसमें मसला यह है कि बेल्स नहीं गिरी तो किसी खिलाड़ी को रन आउट कैसे दिया जाएगा? तो ऐसे में विकेट के पास वाले फील्डर को बेल्स गिराने के बजाय हाथों से विकेट उखाड़ना होगा। लेकिन डायरेक्ट हिट में गेंद विकेट पर लगने पर ही आउट दे दिया जाएगा।