
नई दिल्ली। यूं तो भारतीय क्रिकेट टीम में एक से बढ़कर एक धुरंधर खिलाड़ियों ने देश का नाम रोशन किया। उन्हीं में से एक हैं रमेशचंद्र गंगाराम नदकर्णी। रमेशचंद्र गंगाराम नदकर्णी को बापू नदकर्णी के नाम से भी जाना जाता है। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि बापू के बारे में बहुत कम ही लोग जानते होंगे। इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं। पहला ये कि बापू ने अपने क्रिकेट करियर में केवल 41 मैच खेले थे, उन्होंने 1955 में अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर की शुरुआत की थी और 1968 में अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला। तो वहीं दूसरी वजह ये है कि उस दौर के खिलाड़ियों के बारे में आज कल के फैंस को बहुत कम ही जानकारी होती है।
आज हम आपको बापू के उन कारनामों के बारे में बताएंगे जिससे आप गर्व महसूस करेंगे। बता दें कि साल 1964 में इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए मद्रास टेस्ट में बापू ने कुल 32 ओवर किए थे। 32 ओवर के बॉलिंग फिगर में 27 ओवर मेडन थे। आपको जानकर हैरानी होगी कि 27 में से 21 मेडन तो लगातार किए गए थे। उस मैच में इंग्लैंड के बल्लेबाज़ बापू से रनों की भीख मांग रहे थे। लेकिन बापू ने इंग्लैंड के असहाय बल्लेबाज़ों की कोई मदद नहीं की थी। मैच में बापू ने 32 ओवर में महज़ 5 रन ही दिए थे। बापू ने 41 मैचों में 88 विकेट चटकाए।
आपको बता दें कि गेंदबाज़ी के साथ ही बापू एक कमाल के बल्लेबाज़ भी थे। बापू ने 41 टेस्ट की 67 पारियों में 1414 रन भी शामिल हैं। बापू ने करियर में एक सनसनाता शतक और 7 अर्धशतक भी जड़े थे। 122 रन उनका सर्वाधिक स्कोर रहा। बापू को विश्व का सबसे कंजूस गेंदबाज़ भी कहा जाता है। उन्होंने अपने करियर में महज़ 1.67 की औसत से रन दिए थे। सबसे खास बात ये है कि आज तक इस धरती पर ऐसा कोई गेंदबाज़ पैदा नहीं हुआ जो बापू के 21 लगातार मेडन ओवर का रिकॉर्ड तोड़ दे।