
Asia Cup Trophy Presentation Controversy: एशिया कप की ट्रॉफी को लेकर विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। भारतीय महिला टीम ने खिताब जीतने के बाद ट्रॉफी लेने के लिए पोडियम पर जाने से इनकार कर दिया। वजह थी ट्रॉफी देने वाले अधिकारी का नाम। ACC चेयरमैन मोहसिन नकवी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चेयरमैन भी हैं। वह पाकिस्तान सरकार में मंत्री भी हैं।
अब BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने इस पूरे मामले पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ट्रॉफी प्रेजेंटेशन का तरीका हमेशा ऐसा नहीं था। पहले विजेता टीम को उसके अपने क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख से ट्रॉफी दी जाती थी। सैकिया ने दावा किया कि इस परंपरा में बदलाव पिछले साल किया गया।
देवजीत सैकिया ने बताया कि एशिया कप के पुराने संस्करणों में ट्रॉफी देने का एक तय तरीका था। विजेता टीम को उसके देश के क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख से ट्रॉफी मिलती थी। उन्होंने बांग्लादेश और श्रीलंका का उदाहरण भी दिया। सैकिया ने बताया कि पहले कई मौकों पर बोर्ड के चेयरमैन, अध्यक्ष या सचिव ने विजेता टीम को ट्रॉफी सौंपी थी।
2022 और 2024 में भी श्रीलंका की टीमों को उनके क्रिकेट बोर्ड के तत्कालीन चेयरमैन शम्मी सिल्वा ने ट्रॉफी दी थी। देवजीत का कहना है कि यह व्यवस्था बाद में बदल गई। उनके अनुसार, 2025 में भारत के पुरुषों के एशिया कप जीतने के दौरान नया तरीका सामने आया।
देवजीत सैकिया ने बताया कि रविवार को हुए फाइनल से पहले BCCI ने ACC के सामने अपनी मांग रखी थी। BCCI चाहता था कि ट्रॉफी मोहसिन नकवी की जगह किसी दूसरे अधिकारी से दिलाई जाए। इसके लिए ACC के डिप्टी चेयरमैन का नाम भी सुझाया गया था। सैकिया और BCCI के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने ACC से पूछा था कि क्या डिप्टी चेयरमैन विजेता टीम को ट्रॉफी दे सकते हैं। BCCI का मानना था कि इससे विवाद से बचा जा सकता था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सैकिया ने साफ कहा कि भारतीय बोर्ड अपने पुराने रुख से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि यह स्टैंड करीब डेढ़ साल से कायम है। और आगे ऐसे ही रहेगा।
इस पूरे विवाद पर BCCI सचिव ने भारत-पाकिस्तान क्रिकेट रिश्तों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मौजूदा हालात किसी से छिपे नहीं हैं। ऐसे में सब कुछ सामान्य दिखाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। पिछले एशिया कप में भी भारतीय पुरुष टीम ने पाकिस्तान के खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाया था। टीम ट्रॉफी प्रेजेंटेशन के दौरान भी पोडियम पर नहीं गई थी। अब महिला टीम ने भी इसी रुख को आगे बढ़ाया है। इस पूरे घटनाक्रम ने एशिया कप की ट्रॉफी प्रेजेंटेशन को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। सवाल यही है कि क्या पुरानी परंपरा वापस आएगी या ACC का नया तरीका ही आगे जारी रहेगा।