करीब 10 महीने बाद दिग्गज स्पिनर रविचंद्रन अश्विन के एक बयान ने कोहली और रोहित के टेस्ट रिटायरमेंट के मुद्दे को फिर से हवा दे दी है। अश्विन ने इशारों में संकेत दिया कि कोच गौतम गंभीर कुछ सीनियर खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का इशारा कर रहे थे।
लगभग एक साल बीतने के बाद भी पूर्व कप्तान विराट कोहली और रोहित शर्मा के टेस्ट रिटायरमेंट का मुद्दा ठंडा नहीं पड़ा है। यह फैसला आज भी क्रिकेट जगत में बहस का विषय बना हुआ है।
फैंस का एक बड़ा वर्ग मानता है कि यह फैसला पूरी तरह खिलाड़ियों का निजी नहीं था, बल्कि इसके पीछे टीम मैनेजमेंट की सोच भी शामिल थी। फैंस चीफ सेलेक्टर अजित अगरकर और हेड कोच गौतम गंभीर को इसका ज़िम्मेदारी ठहरते आए हैं।
दरअसल, टेस्ट क्रिकेट में रोहित और कोहली खराब फॉर्म से जूझ रहे थे। बार्डर गावस्कर ट्रॉफी में 1-3 से मिली करारी हार के बाद 7 मई को रोहित ने इंस्टाग्राम के जरिए टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहा, और ठीक पांच दिन बाद 12 मई को कोहली ने भी वही रास्ता अपनाया।
अब करीब 10 महीने बाद दिग्गज स्पिनर रविचंद्रन अश्विन के एक बयान ने इस बहस को फिर से हवा दे दी है। रीवा स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव में बोलते हुए अश्विन ने अपने मिड-सीरीज रिटायरमेंट को याद किया और इशारों में संकेत दिया कि कोच गौतम गंभीर कुछ सीनियर खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का इशारा कर रहे थे।
गंभीर को लेकर सवाल पर उन्होंने हल्के अंदाज में कहा, "अगर किसी को गौतम गंभीर से नाराज़ होना चाहिए, तो वो मैं हूं, है ना? मैं उनके कोच बनने के दूसरे या तीसरे दौरे पर ही टीम से बाहर हो गया…” उन्होंने आगे कहा, “कोच के तौर पर गौतम के पास अपना काम है। अगर उन्हें लगता है कि मुझे, विराट या रोहित को आगे बढ़ जाना चाहिए, तो यह बिल्कुल ठीक है। उस वक्त अगर मुझे इस बात से तकलीफ हुई, तो वह भी मेरी भावना है। लेकिन अगर आप खुद को उस भावना से अलग करके देखें, तो साफ है कि वह अपना काम कर रहे हैं और शायद उनके प्लान में मेरा भविष्य नहीं था।”
सिर्फ कोहली और रोहित ही नहीं, बल्कि अश्विन का रिटायरमेंट भी उतना ही चर्चा में रहा। गाबा टेस्ट ड्रॉ होने के बाद उनके संन्यास ने फैंस को दो हिस्सों में बांट दिया था। पर्थ में खेले गए पहले टेस्ट में अश्विन को मौका नहीं मिला, जहां वॉशिंग्टन सुंदर को उनसे ऊपर तरजीह दी गई। एडिलेड टेस्ट में उनकी वापसी हुई, लेकिन भारत 10 विकेट से हार गया। इसके बाद मेलबर्न टेस्ट से भी उन्हें बाहर कर दिया गया और उसी के बाद अश्विन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया। वह भारत के दूसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज के रूप में रिटायर हुए।
अश्विन ने कहा, “मुझे लगता है कि मेरी सबसे बड़ी ताकत फैसले लेने की क्षमता है। वह सही है या गलत, यह लोग तय करेंगे। लेकिन आखिरकार यह मेरी जिंदगी है और मुझे अपने फैसले खुद लेने हैं। पर्थ टेस्ट के दौरान ही मुझे संकेत मिल गया था कि मेरा समय खत्म हो चुका है। टीम में जडेजा और मैं मुख्य स्पिनर थे, लेकिन वॉशी (वॉशिंगटन सुंदर) को मौका मिला, फिर अगले मैच में मैं आया और उसके बाद फिर बाहर हो गया, तो यह मेरे लिए साफ इशारा था।”
उन्होंने आगे कहा, “अगर किसी और को मेरी जगह लेनी है, तो उन्हें पूरा मौका मिलना चाहिए। मैं उन खिलाड़ियों में से नहीं हूं जो वापसी की उम्मीद में टीम के आसपास बने रहते हैं। मैंने अपने करियर में काफी कुछ हासिल किया है, इसलिए अब इन चीजों में उलझने का कोई मतलब नहीं।”
अश्विन ने अपने नजरिए को साफ करते हुए कहा, “मैंने हमेशा अपने जीवन में सबसे पहले अहंकार को छोड़ने की कोशिश की है, और अभी भी उस प्रक्रिया में हूं। हम सब इंसान हैं, अहंकार आ ही जाता है। लेकिन अगर आप खुद को उससे अलग कर लें, तो चीजें साफ नजर आने लगती हैं। कभी-कभी इस देश में मिलने वाली लोकप्रियता हमें यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि हम अजेय हैं, जबकि हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।”
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