
शिखर धवन 2013 में डेब्यू मुकाबले में शतक का जश्न मनाते हुए (Image: IANS)
Shikhar Dhawan Test Debut 2013: साल 2013, मार्च का महीना था। मोहाली के आईएस बिन्द्रा पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट सीरीज का तीसरा मुकाबला खेला जा रहा था। विराट कोहली के युग की दस्तक हो चुकी थी, लेकिन भारतीय टीम में एक विस्फोटक ओपनर की कुर्सी खाली थी, कई कॉम्बिनेशन ट्राई किए जा रहे थे लेकिन वीरेंद्र सहवाग की जगह भरना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं था। ऐसे में मैदान पर उतरा दिल्ली का एक बाएं हाथ का बल्लेबाज, जिसने उस दिन ऐसी पारी खेली जो टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गई।
18 मार्च 2013 को भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 6 विकेट से हराकर सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त बना ली। लेकिन इस जीत का असली नायक वह डेब्यू पारी थी जो शिखर धवन ने मैच के तीसरे दिन, 16 मार्च को खेली थी। आज ही के दिन इस ऐतिहासिक पल को 13 साल पूरे हो गए हैं, जब शिखर को इस पारी के लिए डेब्यू पर ही मैन ऑफ द मैच चुना गया था।
ऑस्ट्रेलिया ने अपनी पहली पारी में 408 रन बनाए थे। पहले दिन बारिश की भेंट चढ़ चुका था, और कंगारुओं ने स्कोरबोर्ड पर बड़ा नंबर लगाकर भारी दबाव बनाया हुआ था। धवन के लिए यह न सिर्फ पहला टेस्ट था, बल्कि एक ऐसा मौका था जो शायद दोबारा न मिलता। उन्होंने उस मौके को दोनों हाथों से थाम लिया। महज 85 गेंदों पर अपना टेस्ट शतक पूरा कर धवन ने डेब्यू पर सबसे तेज टेस्ट शतक का विश्व रिकॉर्ड बना दिया। वेस्टइंडीज के ड्वेन स्मिथ का 2004 में बनाया 93 गेंदों का रिकॉर्ड ध्वस्त हो गया। धवन ने अपनी पारी में 174 गेंदों पर 187 रन बनाए, जिसमें 33 चौके और 2 छक्के शामिल थे। उनकी स्ट्राइक रेट रही 107.47। यह किसी भारतीय के डेब्यू टेस्ट में सर्वोच्च स्कोर भी था, जिसने गुंडप्पा विश्वनाथ के 1969 में बनाए 137 रनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा।
धवन और मुरली विजय की जोड़ी ने पहले विकेट के लिए 289 रन जोड़े, जो भारत-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट इतिहास की सबसे बड़ी ओपनिंग साझेदारी थी और टेस्ट इतिहास में भारत की ओर से तीसरी सबसे बड़ी ओपनिंग पार्टनरशिप भी। तीसरे दिन का खेल खत्म होते-होते भारत बिना एक विकेट गंवाए 283 रन बनाकर मैच का रुख अपनी तरफ मोड़ चुका था।
इस मैच का जिक्र होते ही सिर्फ धवन का रिकॉर्ड नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क की अप्रत्याशित पारी भी याद आती है। ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी में जब टीम 251/7 पर सिमट चुकी थी, तब नौ नंबर पर उतरे स्टार्क ने बल्ले से भारतीय गेंदबाजों पर ऐसा कहर ढाया कि सब हैरान रह गए। 144 गेंदों पर 99 रन बनाते हुए उन्होंने टीम को 408 के मजबूत स्कोर तक पहुंचाया। 14 चौकों से सजी उनकी पारी देखने लायक थी। लेकिन जब महज 1 रन की दूरी पर शतक था, इशांत शर्मा की गेंद पर बाहरी किनारा लगा और एमएस धोनी ने विकेट के पीछे शानदार कैच लपका। स्टार्क 99 पर पवेलियन लौट गए। यह आज भी स्टार्क के करियर का सर्वोच्च टेस्ट स्कोर है।
खुद स्टार्क ने एक बार अपनी पत्नी एलिसा हीली के साथ बातचीत में माना था कि 99 पर आउट होना उनके जीवन की सबसे पीड़ादायक याद है। अगर वह शतक लगा देते तो 1946-47 के बाद नौ नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए शतक जड़ने वाले पहले ऑस्ट्रेलियाई बनते।
Published on:
18 Mar 2026 03:36 pm
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