रविचंद्रन अश्विन ने खुलासा किया कि ऑस्ट्रेलिया दौरे पर वॉशिंगटन सुंदर को प्राथमिकता मिलने के बाद उन्हें टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने का एहसास हुआ।
टीम इंडिया के पूर्व ऑलराउंडर रविचंद्रन अश्विन ने अचानक ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद टेस्ट क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया था। दिग्गज क्रिकेट ने खुलासा किया है कि उन्हें पहले ही एहसास हो गया था कि संन्यास ले लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि जब ऑस्ट्रेलिया में एक टेस्ट मैच के लिए उनसे कम अनुभवी और युवा वॉशिंगटन सुंदर को प्लेइंग 11 में शामिल किया गया था, तभी अश्विन ने संन्यास का मन बना लिया था।
साल 2024 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर अश्विन को प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली, जिसके बाद उन्होंने सीरीज समाप्त होने पर टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया। मंगलवार को कोलकाता में एक कार्यक्रम के दौरान, अश्विन ने उस पल के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने कहा, "मैं पर्थ में सीनियर गेंदबाज था। वाशी वॉशिंगटन सुंदर ने वह टेस्ट खेला, और मुझे एहसास हो गया कि मेरा समय अब पूरा हो चुका है।"
ब्रिस्बेन टेस्ट के बाद अश्विन के संन्यास लेने के फैसले पर टीम मैनेजमेंट की काफी आलोचना हुई थी। ये वो समय था, जब इस सीरीज के बाद रोहित शर्मा और विराट कोहली ने भी टीम से दूरी बना ली। ऐसी बातें सामने आ रही थीं कि सीनियर खिलाड़ियों को जबरदस्ती संन्यास लेने के लिए मजबूर किया गया है। ऐसे में हेड कोच गौतम गंभीर को सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल किया गया था। हालांकि, अश्विन ने इन सभी बातों को सिरे से खारिज करते हुए गंभीर के काम करने के तरीके का समर्थन किया।
अश्विन ने कहा, "मुझे गौतम पसंद हैं। हो सकता है कि उनके बारे में लोगों की राय अलग-अलग हो, लेकिन वह ऐसे इंसान हैं जो हमेशा टीम को किसी भी खिलाड़ी से ऊपर रखते हैं। वह जीत का श्रेय किसी एक खिलाड़ी को नहीं, बल्कि पूरी टीम को देते हैं, उनकी यही बात मुझे सबसे ज्यादा पसंद है।" अश्विन ने भारतीय ड्रेसिंग रूम के माहौल और किसी एक खिलाड़ी पर ही निर्भर न रहने की अहमियत के बारे में कहा, "भारतीय क्रिकेट सिर्फ कुछ लोगों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह उससे कहीं ज्यादा बड़ा है।"
विराट कोहली और रोहित शर्मा के साथ अपने लंबे जुड़ाव को याद करते हुए, अश्विन ने उन वर्षों के दौरान टीम के खिलाड़ियों के बीच मौजूद मजबूत तालमेल और आपसी भाईचारे का जिक्र करते हुए कहा, "हम सभी में सबसे अच्छी बात यह थी कि कोई भी एक-दूसरे पर हार का ठीकरा नहीं फोड़ता था। हम सभी चाहते थे कि भारत जीते और पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन करे। हम सभी इसी एक लक्ष्य को लेकर पूरी तरह से प्रेरित थे।"
आर अश्विन ने भारत के लिए 106 टेस्ट मैच खेले, जिसमें 537 विकेट हासिल किए। इस दौरान 37 बार पारी में 5 या उससे ज्यादा विकेट हासिल किए।