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Sushant Singh Rajput की मौत पर बोले Robin Uthappa, उनके मन में भी आया था आत्महत्या का ख्याल

Sushant Singh Rajput की मौत से Team India को 2007 में पहला T20 World Cup कप जिताने में मुख्य भूमिका निभाने वाले Robin Uthappa शॉक में हैं।
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Robin uthappa on Sushant Suicide
Robin uthappa on Sushant Suicide

नई दिल्‍ली : महेंद्र सिंह धोनी (Mahendra Singh Dhoni) की बायोपिक में मुख्य भूमिका निभाने वाले सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) ने 14 जून रविवार को अचानक आत्‍महत्‍या कर ली। उन्‍होंने मुंबई के बांद्रा स्थित अपने घर में फांसी लगा लिया। अब बताया जा रहा है कि वह डिप्रेशन से जूझ रहे थे। इस कारण उन्होंने ऐसा कदम उठाया है। इस खबर से टीम इंडिया (Team India) को 2007 में पहला टी-20 विश्व (T20 World Cup) कप जिताने में मुख्य भूमिका निभाने वाले रॉबिन उथप्‍पा (Robin Uthappa) भी शॉक में हैं। उन्होंने सुशांत की मौत पर अपनी संवेदना प्रकट की और खुलासा किया, वह भी दो साल तक डिप्रेशन से जूझते रहे हैं।

बोले, सुशांत की दर्द की कल्पना नहीं की जा सकती

रॉबिन उथप्पा ने कहा कि वह खुद दो साल तक डिप्रेशन से जूझ चुके हैं। उनके खुद के मन में बार-बार बॉलकनी से कूद कर आत्‍महत्‍या करने का विचार आता था। सुशांत की आत्महत्या पर उन्होंने कहा कि यह समझ के परे और हैरानीभरा है। साथ में यह भी कहा कि उस दर्द की कल्‍पना नहीं की जा सकती, जिससे सुशांत जूझ रहे थे।

बात करने की जरूरत

मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) पर बात करते हुए रॉबिन उथप्‍पा ने कहा कि अगर आप ठीक नहीं हैं तो इसमें कोई बुराई नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा है तो जरूरी यह है कि हम उस पर बात करें। बताएं कि हमारे भीतर क्या चल रहा है। यह बहुत जरूरी है। उथप्पा ने कहा कि वह इसे बार-बार नहीं दोहरा सकते। हम जितना समझते हैं, यह विचार उससे ज्‍यादा मजबूत होता है। अगर आप ठीक नहीं हैं तो कोई बात नहीं। उस पर बात करें।

उथप्पा बोले, क्रिकेट ने आत्महत्या से बचा लिया

बता दें कि कुछ समय पहले अपने डिप्रेशन के बारे में रॉबिन उथप्पा ने बताया था। उन्होंने कहा था कि उनके मन में 2009 से लेकर 2011 के बीच वह लगातार आत्‍महत्‍या के विचारों से जूझते रहे थे। उनके मन में यह ख्याल आता था कि वह बालकनी से कूद जाएं। वह क्रिकेट ही था, जिसने उन्हें बालकनी से कूदने से रोका था।

बताया डिप्रेशन में क्या सोचते थे

रॉबिन उथप्पा ने कहा कि वह इस मुश्किल घड़ी में इधर- उधर बैठकर सिर्फ यही सोचते थे कि वह दौड़कर जाएं और बालकनी से कूद जाएं। मगर किसी चीज ने उन्‍हें इससे रोक रखा था। इसके बाद उन्‍होंने अपनी डायरी लिखनी शुरू की। इसके बाद एक इंसान के तौर पर उन्होंने खुद को समझना शुरू किया। इसके बाद बाहरी मदद भी ली, ताकि अपनी जिंदगी में बदलाव ला सकें।

Updated on:
15 Jun 2020 12:55 pm
Published on:
15 Jun 2020 12:52 pm