बुराड़ी हत्‍याकांड के दूसरे दिन भी दिल्‍ली पुलिस नहीं उठा पाई हत्‍या के राज से पर्दा।
नई दिल्ली। बुराड़ी हत्याकांड के दूसरे दिन भी दिल्ली पुलिस इस घटना के राज से पर्दा नहीं उठा पाई है। दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह हत्या है या आत्महत्या, इस बारे में अंतिम निष्कर्ष पर इतना जल्द पहुंचना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से दिल्ली पुलिस एक रजिस्टर के हवाले से अंधविश्वास के आधार पर खुदकुशी का जिक्र कर रही है उसे आप खारिज नहीं कर सकते लेकिन मेरी राय इससे इतर है।
रजिस्टर के राज को अंतिम सत्य न मानें पुलिस
उन्होंने कहा कि यह हत्या या आत्महत्या में कुछ भी हो सकता है। उन्होंने ब्लू व्हेल गेम का जिक्र करते हुए कहा कि हो सकता है कि भाटिया परिवार किसी तांत्रिक के संपर्क में हो। तांत्रिक ने सम्मोहन विद्या के जरिए भटिया परिवार को अपने वश में कर लिया हो। वश में करने के बाद उक्त तांत्रिक ने अपने स्वार्थ को अंजाम देने के लिए भाटिया परिवार को मोक्ष हासिल करने के लिए उकसाया हो। इसके लिए आत्महत्या को बेहतर तरीका बताया हो। लेकिन रजिस्टर में लिखी बात को इस स्टेज में अंतिम सत्य मानकर नहीं चला जा सकता है। दिल्ली पुलिस को चाहिए कि वो हत्या के असली कारणों तक पहुंचने की कोशिश करे।
खुले मन से जांच करे पुलिस
विक्रम सिंह ने कहा कि बुराड़ी हत्याकांड की गुत्थी बुरी तरह उलझी हुई है। इसलिए दिल्ली पुलिस को चाहिए कि इस केस की जांच खुले मन से करे। उन्होंने अपने अनुभवों के आधार पर बताया है कि इस केस को गंभीरता से लेने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने इस बात की आशंका जाहिर की है कि यह मामला बहुत पेचीदा है। यह घटना इस बात की ओर भी संकेत करती है कि भाटिया परिवार किसी दुष्चक्र में तो नहीं फंस गया था। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस ने इस केस की जांच को गंभीरता से नहीं लिया तो इसकी जांच भटक किसी और दिशा में सकती है। जांच गलत दिशा में जा सकता है। इसलिए खुले मन से पुलिस इस बात की जांच करे।
पुलिस गलतबयानी न करे
बुरारी कांड के बाद पहली बार भाटिया परिवार की तरफ से एक महिला सामने आई हैं। महिला का नाम सुजाता भाटिया है। उन्होंने बताया है कि भाटिया परिवार किसी धर्म गुरु या तांत्रिक के संपर्क में नहीं था। आम लोगों की तरह वो लोग भी बहुत सरल स्वभाव के थे। एक सामान्य परिवार में जिस स्तर पर धर्म के प्रति रुझान होता है उसी तरह वो लोग भी धार्मिक गतिविधियों को पालन करते थे। इसमें असहज जैसा कुछ नहीं था। उन्होंने दिल्ली पुलिस से कहा है कि वो जल्दबाजी में गलत बयान देकर मामले को किसी और दिशा में भटकाने का काम न करे। पुलिस की तरफ से इस तरह से बयान जारी होने पर केस पर असर पड़ेगा। पुलिस गलतबयानी न करे। जिससे केस पर असर पड़े। पुलिस इस मामले की गहनता से जांच करे।