मिडनाइट स्ट्राइक के जरिए वन विभाग ने साफ संदेश दे दिया है कि, जंगल अब अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकाना नहीं रहा।
झाबुआ. सजेली नानियासात के जंगलों में हाल ही में हुई गोहत्या की घटना के बाद वन विभाग ने आक्रामक सुरक्षा रणनीति अपनाते हुए मंगलवार देर रात बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया। जब पूरा इलाका गहरी नींद में था, तब डीएफओ भारत सोलंकी के नेतृत्व में एसडीओ, तीन रेंजर और 50 से अधिक वनकर्मी रात 11 बजे से तडक़े 3 बजे तक जंगल में उतरे। चार घंटे तक चले इस सघन अभियान में पूरे क्षेत्र को खंगालकर यह संदेश दिया गया कि वन विभाग अब किसी भी अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगा। यह सामान्य औपचारिक गश्त नहीं, बल्कि वन सुरक्षा व्यवस्था का लिटमस टेस्ट था। रणनीति के तहत पूरे इलाके को अलग-अलग जोन में बांटा गया। मुख्य फोकस राखडिय़ा बीट पर रहा, जहां गोहत्या की घटना हुई थी। इसके साथ ही बीट क्रमांक 74, 75, 76 और 81 के अंतर्गत आने वाले करीब 1000 हेक्टेयर घने वन क्षेत्र के चप्पे-चप्पे की सघन तलाशी ली गई। अभियान में झाबुआ रेंजर अभिलाषा राव, पेटलावद रेंजर ओमप्रकाश बिरला और थांदला रेंजर तोलाराम हटीला सहित बड़ी संख्या में वनकर्मी शामिल रहे।
सर्च ऑपरेशन का मुख्य केंद्र वे सीमावर्ती गांव रहे, जहां से संदिग्धों की आवाजाही की आशंका बनी रहती है। टीम ने छोटा घोंसलिया, बड़ा घोंसलिया, बेड़ावली और झारा डाबर से लगे वन क्षेत्रों में गहन सर्चिंग की। इस दौरान न केवल गो-तस्करी जैसी गतिविधियों पर नजर रखी गई, बल्कि वन भूमि पर संभावित नए अवैध अतिक्रमण की भी जांच की गई। राहत की बात यह रही कि अभियान के दौरान कोई संदिग्ध गतिविधि या नया अतिक्रमण सामने नहीं आया।
वन विभाग ने साफ कर दिया है कि गोहत्या जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति किसी भी कीमत पर नहीं होने दी जाएगी। सीमाओं पर निगरानी बढ़ा दी गई है और जिम्मेदारी तय करने की नीति भी लागू की जा रही है।