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क्या है बहुचर्चित चारा घोटाला, जानें कब क्या हुआ ?

देश के बहुचर्चित चारा घोटाले मामले में आज सीबीआई की विशेष अदालत अपना फैसला सुनाएगी।

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Dec 23, 2017

नई दिल्ली। देश के बहुचर्चित चारा घोटाले मामले में आज सीबीआई की विशेष अदालत का फैसला आना है। इसके साथ ही घोटाले के मुख्य आरोपी बिहार के पूर्व सीएम और आरजेडी के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव का राजनीति भविष्य भी तय होगा। बता दें कि लालू प्रसाद के अलावा इस मामले में बिहार के पूर्व सीएम डॉ. जगन्नाथ मिश्र समेत 22 लोग अभियुक्त हैं। रांची स्थित सीबीआई अदालत के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह ने 23 दिसंबर को फैसले की तारीख तय की थी। लालू प्रसाद ने न्यायपालिका में पूर्ण विश्वास जताते इंसाफ मिलने का दावा किया है।

चारा घोटाले की टाइम लाइन

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— 1990 के दशक में हुए चारा घोटाला मामले में आरजेडी मुखिया लालू यादव और जगन्नाथ मिश्रा को दोषी करार दिया गया। इस राजनीतिक घटना के बाद लालू यादव का सियासी सफर भंवर में फंसता नजर आया। चारा घोटाले में उन पर पशुओं के चारे के नाम पर चाईबासा ट्रेजरी से 37.70 करोड़ रुपए की निकासी का आरोप था।— 27 जनवरी - — 11 मार्च 1996 को पटना हाईकोर्ट ने चारा घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपे का आदेश जारी किया।
— 19 मार्च 1996 को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश की पुष्टि करते हुए हाईकोर्ट की बेंच को निगरानी करने को का आदेश दिया।
— 27 जुलाई 1997 को सीबीआई ने चारा घोटाला मामले आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव पर शिकंजा कसा।
— 30 जुलाई 1997 को आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद ने सीबीआई कोर्ट के समक्ष समर्पण कर दिया।
— 19 अगस्त 1998 को लालू प्रसाद और उनकी पत्नी राबड़ी देवी के खिलाफ आय से अधिक की सम्पत्ति का केस दर्ज कराया गया।
— 4 अप्रैल 2000 को सीबीआई ने लालू प्रसाद यादव के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। चार्जशीट में उनकी पत्नी राबड़ी देवी को भी आरोपी बनाया गया।
—5 अप्रैल 2000 को आरजेडी मुखिया लालू प्रसाद और राबड़ी देवी ने आत्मसमर्पण कर दिया। जिसके बाद राबड़ी देवी को जमानत दे दी गई।
— 9 जून 2000 को कोर्ट में लालू प्रसाद यादव के खिलाफ आरोप तय किये।
— अक्टूबर 2001 को सर्वोच्च न्यायालय ने झारखण्ड को अलग राज्य बनने के बाद इस मामले का वहां ट्रांफर कर दिया। इस दौरान लालू ने झारखण्ड में आत्मसमर्पण कर दिया।

— 18 दिसम्बर 2006 को लालू राबड़ी दोनों को आय से अधिक सम्पत्ति के मामले में क्लीन चिट दी।
— 2000 से 2012 के बीच इस मामले में लगभग 350 लोगों की गवाही हुई।
— 17 मई 2012 को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में लालू यादव पर मामले को लेकर नए आरोप लगाए गए।
— 17 सितम्बर 2013 को चारा घोटाला मामले में रांची की स्पेशल कोर्ट ने अपना फैसला रिजर्व कर लिया।
— 30 सितम्बर 2013 को चारा घोटाला मामले में आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव दोषी करार दे दिया गया।

क्या है घोटाला

दरअसल, यह बहुचर्चित घोटाला 1996 में सामने आया था। बता दें कि 1990 से 1994 के बीच देवघर कोषागार से 89 लाख, 27 हजार रुपये का फर्जीवाड़ा कर अवैध रूप से पशु चारे के नाम पर निकासी किए। इस मामले में कुल 38 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इन आरोपियों के खिलाफ सीबीआई ने 27 अक्तूबर, 1997 को मुकदमा रजिस्टर्ड किया था। चौंकाने वाली बात यह कि मामले से कुल आरोपियों में से अब तक 11 की मौत हो चुकी है। जबकि 3 लोगों सीबीआई के गवाह बन चुके हैं। इसके अलावा मामले से जुड़े दो लोग अपना जुर्म स्वीकार चुके हैं। मौजूदा समय में केस से जुड़े 22 आरोपियों को लेकर फैसला सुनाया जाना है।

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Published on:
23 Dec 2017 12:39 pm
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