Damoh voter list controversy: मामला दमोह जिले के हटा के हिंडोरिया बस स्टैंड क्षेत्र का बताया जा रहा है, जहां बड़ी मात्रा में 2026 की नई वोटर लिस्ट कबाड़ी के पास देखी गई।
Damoh voter list controversy: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के पूरा होने के कुछ ही दिनों बाद एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने एसआइआर प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां 2026 की नवीन मतदाता सूची कथित तौर पर कबाड़ में मिली है। मामला दमोह जिले के हटा के हिंडोरिया बस स्टैंड क्षेत्र का बताया जा रहा है, जहां बड़ी मात्रा में 2026 की नई वोटर लिस्ट कबाड़ी के पास देखी गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जैसे ही इसकी जानकारी फैली, मौके पर लोगों की भीड़ लग गई। इन लोगों ने मतदाता सूची के पन्नों को 2026 की नई मतदाता सूची बताया है।
एसआईआर प्रक्रिया के तहत हाल ही में यह सूची तैयार की गई थी। इस प्रक्रिया में शासन की ओर से पर्याप्त संसाधन लगाए गए थे। शिक्षकों और कर्मचारियों ने कठिन परिस्थितियों में घर-घर पहुंचकर मतदाताओं का सत्यापन और डेटा एकत्र किया था। ऐसे में इतनी संवेदनशील चुनावी दस्तावेज का कबाड़ में मिलना गंभीर प्रशासनिक चूक की ओर संकेत करता है।
पड़ताल में अबरार कबाड़ी ने बताया कि उसे ये कागज सामान्य रद्दी के रूप में मिले थे। उसके अनुसार उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि ये चुनावी दस्तावेज हैं। जब लोगों ने आपत्ति जताई तो संबंधित व्यक्तियों ने आकर कागज वापस ले लिए। इधर, मामले में मतदाता सूची बेचने वाले का नाम भी सामने आया है। राजाराम अहिरवार के परिवार के बच्चों द्वारा कबाड़ी को यह मतदाता सूची बेची थीं। बाद में जानकारी मिलने पर सूची वापस ले ली गई। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।
इस मामले की जानकारी लगते ही जिला निर्वाचन अधिकारी सुधीर कुमार कोचर ने तुरंत हिंडोरिया नायब तहसीलदार को जांच के लिए मौके पर भेजा। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि यह मतदाता सूची बसपा पार्टी के माध्यम से कबाड़ में बेची गई है। सभी राजनीतिक दलों को एक-एक कॉपी विधानसभा-वार दी गई थी।
जांच प्रतिवेदन बनाया जा रहा है। यह मतदाता सूची बसपा के माध्यम से कबाड़ में बेचे जाने की बात सामने आई है। अभी जांच प्रतिवेदन बन रहा है। इसे जिला निर्वाचन अधिकारी को भेजा जाएगा।
-राकेश मरकाम, एसडीएम, हटा