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MP के दमोह में कलेक्टर के सामने भिड़े दो पक्ष, 100 करोड़ के प्रोजेक्ट को लेकर भड़का विवाद

Corridor Construction: कलेक्टर के सामने दोनों पक्षों के बीच जमकर बहस और तीखी नोकझोंक हुई। माहौल इस कदर गरमा गया कि काफी देर तक तू-तू मैं-मैं चलती रही।

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दमोह

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Akash Dewani

May 30, 2026

Two parties clashed in front of Collector corridor construction mp news

Two parties clashed in front of Collector (Patrika.com)

Corridor Construction: मध्य प्रदेश के दमोह जिले से चौंकाने वाला मामला सामने आया। शनिवार को बनवर क्षेत्र के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल जागेश्वरधाम बांदकपुर में बन रहे 100 करोड़ रुपए के कॉरिडोर निर्माण की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। जो भारी विवाद और हंगामे की भेंट चढ़ गई, जब कलेक्टर प्रताप नारायण यादव की मौजूदगी में ही दो पक्ष आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों के बीच जमकर बहस और तीखी नोकझोंक हुई। माहौल इस कदर गरमा गया कि काफी देर तक तू-तू मैं-मैं चलती रही। बाद में एसडीएम सौरव गंधर्व सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने बीच-बचाव व हस्तक्षेप कर स्थिति को संभाला और दोनों पक्षों को शांत कराया। विवाद थमने के बाद कलेक्टर ने बैठक जारी रखी और निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए।

खसरा नंबर 180 और अतिक्रमण की अफवाह पर विवाद

बैठक के दौरान बांदकपुर सरपंच सुनील डब्लू और स्थानीय व्यापारी बड़ी संख्या में मौजूद थे। सरपंच ने झंडा बाजार स्थित खसरा नंबर 180 की भूमि का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि इस बेशकीमती भूमि को जानबूझकर अतिक्रमण बताया जा रहा है, जबकि पूर्व में हुई राजस्व जांच में यह पूरी तरह स्पष्ट हो चुका है कि यह आबादी क्षेत्र है और यहां किसी भी प्रकार का अतिक्रमण नहीं है। उन्होंने बैठक में उपस्थित तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारी से इस पर तत्काल स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

इसके अलावा, स्थानीय लोगों और व्यापारियों में इस बात को लेकर भी भारी आक्रोश था कि हाल ही में क्षेत्र के करीब 250 मकानों और दुकानों पर निशान लगाए गए थे। इसके बाद बाजार में यह अफवाह फैला दी गई कि इन सभी दुकानों को गिराया जाएगा, जिससे व्यापारियों में भय का माहौल था। हालांकि, प्रशासन की ओर से ऐसा कोई आदेश जारी नहीं हुआ था। असल में, पर्यटन विभाग और पूर्व कलेक्टर द्वारा केवल सीमांकन करने के निर्देश दिए गए थे, जिसे गलत तरीके से पेश किया गया।

पूरा बांदकपुर डूब जाए .. बयान पर विवाद

विवाद की मुख्य वजह जल निकासी की समस्या रही। स्थानीय लोगों ने कलेक्टर से शिकायत की कि कॉरिडोर निर्माण के पहले चरण का 50प्रतिशत काम होने के बावजूद अब तक जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे आने वाले समय में जलभराव का खतरा है। इसी दौरान एक पक्ष के व्यक्ति ने टिप्पणी कर दी कि पूरा बांदकपुर डूब जाए, लेकिन कॉरिडोर का निर्माण कार्य नहीं रुकना चाहिए। इस विवादित बयान को सुनते ही व्यापारी और स्थानीय नागरिक भड़क उठे और बैठक में जमकर हंगामा शुरू हो गया।

व्यापारियों और सरपंच का साफ कहना था कि खसरा नंबर 180 में कई पीढिय़ों से लोग निवास कर रहे हैं और यह पूरी तरह आबादी क्षेत्र है। ऐसे में किसी बाहरी या अन्य व्यक्ति द्वारा इसे अतिक्रमण बताना और इस पर एकतरफा निर्णय थोपना कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर बमुश्किल मामला शांत कराया।

भक्त मंडल से जुड़े कृष्णा पटेल और शंकर गौतम ने कहा कि कॉरिडोर निर्माण स्थल के आसपास की जमीनों पर कब्जा करने वाले लोगों को पट्टे नहीं दिए जाने चाहिए। उनका तर्क था कि यदि पट्टे जारी किए गए तो भविष्य में कॉरिडोर विस्तार और विकास कार्य प्रभावित होंगे।

100 करोड़ के प्रोजेक्ट में देरी पर कलेक्टर सख्त

विवाद शांत होने के बाद कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने कॉरिडोर निर्माण की समीक्षा की। उन्होंने बताया कि जागेश्वरधाम कॉरिडोर का निर्माण लगभग 100 रुपए करोड़ की भारी-भरकम लागत से कराया जा रहा है, जिसके पहले चरण में करीब 10 करोड़ रुपए के कार्य स्वीकृत हैं। कलेक्टर ने निर्माण एजेंसी की कछुआ चाल और लापरवाही पर सख्त नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि तय समयसीमा के अनुसार 30 मई 2026 तक पहले चरण का कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण हो जाना चाहिए था, लेकिन विडंबना है कि अभी तक 50 प्रतिशत कार्य भी पूरा नहीं हो सका है। कलेक्टर ने निर्माण एजेंसी को तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी करने और गुणवत्ता से समझौता किए बिना समयसीमा में कार्य पूर्ण करने के कड़े निर्देश दिए।

स्थानीय सुझावों को शामिल करने के निर्देश

कलेक्टर ने अंत में कहा कि यह प्रोजेक्ट पूरे जिले की आस्था और जनभावनाओं से जुड़ा हुआ है। इसे भव्य रूप देना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है ताकि यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को सुगमता से दर्शन लाभ मिल सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कॉरिडोर के निर्माण कार्य में स्थानीय लोगों और व्यापारियों के व्यावहारिक सुझावों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद या गतिरोध की स्थिति निर्मित न हो।