
Damoh Nauradehi Tiger Reserve: मध्य प्रदेश को देश में भेड़ियों की महत्वपूर्ण आबादी वाला राज्य माना जाता है, और दमोह, सागर तथा नरसिंहपुर जिलों की सीमाओं तक फैला वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) भारतीय ग्रे वुल्फ (इंडियन ग्रे वुल्फ) के प्राकृतिक आवास के रूप में अपनी पहचान रखता है। इस संरक्षित क्षेत्र में पिछले करीब 51 वर्षों से इन भेड़ियों का अनवरत अस्तित्व कायम है। देश के कई अन्य हिस्सों में इनके प्राकृतिक आवास लगातार सिमट रहे हैं, लेकिन नौरादेही में इनके लिए बेहद अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं।
रिजर्व में भारतीय भेड़ियों को लेकर राज्य वन अनुसंधान संस्थान (एसएफआरआई) जबलपुर द्वारा शोध किया जा रहा है। इस शोध के तहत इनके रहन-सहन, आवास, खान-पान और व्यवहार का बारीकी से अध्ययन हो रहा है। रिजर्व प्रबंधन को पूरी उम्मीद है कि वर्ष 2026 में अखिल भारतीय बाघ आंकलन के दौरान लगाए गए ट्रैप कैमरों में कैद आंकड़ों के आधार पर भेड़ियों की सटीक संख्या का भी आधिकारिक आकलन सामने आ जाएगा।
गौरतलब है कि वर्ष 1975 में स्थापित नौरादेही अभयारण्य में 2018 की बाघ पुनर्स्थापना परियोजना के बाद बाघों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है और वर्तमान में यहां करीब 30 बाघ मौजूद हैं। सितंबर 2023 में इसे आधिकारिक तौर पर टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला। हालांकि, टाइगर रिजर्व बनने से पहले भी नौरादेही की मुख्य पहचान भारतीय भेड़ियों के प्राकृतिक गढ़ के रूप में ही रही है।
वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. रजनीश सिंह ने बताया कि यहां पाए जाने वाले इंडियन ग्रे वुल्फ मध्य और उत्तरी भारत की प्रमुख प्रजाति हैं। इनके लिए खुले घास के मैदान सबसे उपयुक्त होते हैं। नौरादेही क्षेत्र में गांवों के विस्थापन के बाद खाली हुई जमीन अब प्राकृतिक घास के मैदानों में परिवर्तित हो रही है, जो भेड़ियों के लिए आवास और भोजन की बेहतरीन परिस्थितियां तैयार कर रही है। यदि इस बार की रिपोर्ट में इनकी संख्या में वृद्धि दर्ज होती है, तो यह दमोह, सागर, नरसिंहपुर और पूरे बुंदेलखंड के लिए जैव विविधता संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि होगी।