दमोह

आधार कार्ड फर्जीवाड़ा: देश के 6 राज्यों में हजारों कार्ड बने, कई अफसरों की भूमिका संदिग्ध, दो ऑपरेटर पर केस

Damoh Aadhar Case- एमपी के दमोह की आधार आईडी से देश के 6 राज्यों और 20 से अधिक जिलों में आधार कार्ड बनाए जाने के मामले में अब पुलिस जांच बढ़ गई है।

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May 26, 2025
Damoh Aadhar ID Case

Damoh Aadhar Case- एमपी के दमोह की आधार आईडी से देश के 6 राज्यों और 20 से अधिक जिलों में आधार कार्ड बनाए जाने के मामले में अब पुलिस जांच बढ़ गई है। इस संबंध में पत्रिका के खुलासे और लगातार खबरों के 24 दिन बाद पुलिस ने आखिरकार मामले में दो आधार आइडी ऑपरेटर के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर लिया है। मामले में कई अफसरों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं , अब ई गवर्नेंस प्रबंधक, लोक सेवा संचालक और प्रबंधक के विरुद्ध भी जांच के दौरान आए तथ्यों और आइडी ऑपरेटर के बयानों पर आरोप तय किए जा सकते हैं। इसके अलावा आधार से संबंधित अन्य अधिकारियों की संलिप्तता भी इसमें मिलने पर आगे कार्रवाई हो सकती है।

पुलिस अधीक्षक- एसपी श्रुतकीर्ति सोमवंशी ने बताया कि जिन आधार आइडी से यह आधार कार्ड बनाए गए हैं, उनके विरुद्ध कार्रवाई की गई है। लोक सेवा केंद्र दमयंतीपुरम की आधार आइडी ऑपरेटर विजय शुक्ला और ग्राम पंचायत गोलापटी आइडी ऑपरेटर राहुल रैकवार के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किए गए हैं।

एसपी के अनुसार आधार के अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर और नियमों के पढऩे के बाद यह कार्रवाई की गई है। मामले में स्पष्ट हो रहा है कि फर्जी आधार कार्ड या अपडेशन का जो काम हुआ है, उसमें प्रारंभिक तौर पर आइडी ऑपरेटर के आरोप तय हो रहे हैं। इन दोनों आइडी ऑपरेटर से हम पूछताछ करेंगे। आधार आइडी संबंधी डिटेल शेयर करना, गड़बड़ी करना सहित अन्य बिंदुओं पर सवाल किए जाएंगे। इसके आधार पर जो आरोप और तथ्य सामने आएंगे, जोड़े जाएंगे और संबंधितों के विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी।

देश के बाहर के फर्जी आधार तो नहीं बने, जांच जारी

एसपी श्रुतकीर्ति सोमवंशी ने बताया कि प्रदेश के बाहर जो आइडी संचालित हुई है और उसमें कोई फर्जी आइडी बनी है, उसमें पता लगाया जा रहा है कि जिन लोगों की आइडी बनी है, वह कहां से आए हैं! वे देश के बाहर तो नहीं हैं! इस संबंध में भी पत्राचार किया गया है। जानकारी प्राप्त होते ही आगे कार्रवाई की जाएगी।

अब भी कुछ अनसुलझे सवाल?

  • पुलिस ने 24 दिन बाद आधार आईडी ऑपरेटरर्स पर प्रकरण दर्ज किया है, जबकि अब तक कोई विशेष जांच अधिकारी नियुक्त नहीं।
  • मुख्य जांच में प्रशासन की तरफ से ई गवर्नेंस अधिकारी को पुलिस के सहयोग के लिए रखा गया है, जबकि प्रकरण में वह भी संदेह के दायरे में है।
  • जिन आधार आइडी ऑपरेटर पर प्रकरण दर्ज हुए हैं, उनके पीछे के लोगों पर कार्रवाई में देरी होना।
  • पुलिस के पास जांच होने पर कलेक्टर द्वारा प्रशासन स्तर पर होनी वाली कार्रवाई नहीं करना।
Updated on:
26 May 2025 08:20 pm
Published on:
26 May 2025 08:19 pm
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