
Damoh Village Road Problem: मध्यप्रदेश के दमोह जिले की हटा तहसील मुख्यालय से महज चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित बोरी ग्राम और बोरी कला के ग्रामीण आज भी सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हटा-पटेरा मुख्य मार्ग से गांव को जोड़ने वाला कच्चा रास्ता बारिश के दिनों में दलदल में तब्दील हो जाता है। सबसे ज्यादा परेशानी गांव के स्कूली बच्चों को उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों के अनुसार कई स्थानों पर तो पैर दो इंच तक जमीन में धंस जाते हैं।
सरकारी स्कूल तक पहुंचने के लिए बच्चों को इसी कीचड़ भरे रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। बच्चे किसी तरह स्कूल पहुंचते हैं तो उनकी स्कूल ड्रेस पूरी तरह कीचड़ से सन चुकी होती है। स्थिति यह है कि बच्चे बारिश के मौसम में जूते पहनकर स्कूल नहीं जा पाते। कीचड़ में जूते फंसने के कारण कई बच्चे हाथ में जूते-चप्पल लेकर रास्ता पार करते हैं और स्कूल के नजदीक पहुंचकर उन्हें पहनते हैं। ऐसे हालात में बच्चों की पढ़ाई और उनके मनोबल पर भी असर पड़ना स्वाभाविक है।
बोरी और बोरी कला को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाला यही रास्ता ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा है। बारिश के मौसम में रास्ते की हालत इतनी खराब हो जाती है कि एंबुलेंस तक गांव पहुंचने में परेशानी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि आपात स्थिति में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन जाता है। चुनाव के समय गांवों की समस्याओं और विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद वही ग्रामीण अपनी समस्याओं के साथ छोड़ दिए जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से सड़क निर्माण की मांग की जा रही है, बावजूद इसके समस्या जस की तस बनी हुई है।
रानी कुशवाहा, पूना कुशवाहा, नीरज कुशवाहा, परमलाल पटेल, कृष्णा पटेल, राजा कुशवाहा, पुष्पेंद्र पटेल, लोकेश पटेल, बृजेंद्र पटेल, हेमलता पटेल, मीना पटेल, हरिराम पटेल, प्रभु पटेल, हेमराज पटेल और सीताराम पटेल सहित ग्रामीणों ने प्रशासन से सड़क निर्माण की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी यदि स्कूल जाने वाले बच्चों को कीचड़ में पैर धंसाकर पढ़ने जाना पड़े और मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए सड़क उपलब्ध न हो, तो यह स्थिति प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के लिए गंभीर चिंता का विषय होना चाहिए।