6 नवंबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

शक्कर के भाव एक सप्ताह में 13 रुपए, महीने में 16 रुपए तक बढ़े, कितना जाएगा भाव

दो महीने में 20 रुपए किलो बढ़े शक्कर के दाम, दमोह जिले के लोगों पर हर माह बढ़ेगा 3 करोड़ का बोझ, दमोह जिले में 50 टन शक्कर की रोजाना है खपत, बढ़ते भाव से आम आदमी हलाकान
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

दमोह

•

image

Samved Jain

•

Updated: 20 Aug 2026, 5:22 PM IST

Stock Market News

चीनी बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में तेजी आई है। (Source- Freepik)

damoh news : दो महीने पहले तक 42 से 44 रुपए किलो तक बिकने वाली शक्कर अब 64 रुपए किलो हो गई है। बीते एक हफ्ते में ही शक्कर के दाम 12 रुपए तक बढ़ गए हैं, जबकि दो महीने में यह बढ़ोत्तरी 20 रुपए किलो तक हो गई है। नियमित खाद्य सामग्री में शामिल शक्कर के दाम में इतनी बड़ी बढ़ोत्तरी का असर सीधे लोगों के जेब पर पड़ रहा रहा है। एक एनालिसिस के अनुसार बढ़े हुए 20 रुपए से हर माह जिले की जनता पर अकेले शक्कर खरीदी में 3 करोड़ रुपए तक का अतिरिक्त बोझ बढ़ जाएगा। जिसका सीधा फायदा कालाबाजारी करने वाले, व्यापारियों और सरकारों को होगा। शक्कर के अलावा अन्य नियमित खाद्य सामग्रियों के भावों में भी बढ़ोत्तरी से पहले ही महंगाई ने लोगों को हलाकान कर रखा है।

25 से 30 ग्राम प्रति व्यक्ति रोजाना उपयोग हो रही शक्कर


जिले की 15 लाख आबादी में रोजाना शक्कर की खपत करीब 50 हजार किलो यानि 50 टन औसत होती है। ऐसे में हर माह करीब डेढ़ लाख किलो शक्कर उपयोग होती है। प्रति व्यक्ति के रोजाना के हिसाब से देखें तो शक्कर का उपयोग प्रतिदिन 25 से 30 ग्राम है। इसके अलावा मिठाई दुकानों, चाय, नाश्ता की दुकानों, होटलों सहित अन्य व्यवसाय के लिए भी भारी मात्रा में शक्कर उपयोग होती है। ऐसे में शक्कर नियमित उपयोग होने महत्वपूर्ण खाद्य सामग्री हैं। इसके भाव में बढ़ोत्तरी से हर दिन लोगों के जेब पर 10 लाख का अधिक बोझ बढ़ेगा, जो कि महीने में 3 करोड़ होता हैं।

38 से 50 रहा है शक्कर का औसत भाव


पत्रिका ने शक्कर के बढ़ते लगातार भाव के बीच बाजार में व्यापारियों से बात की। व्यापारी विवेक जैन ने बताया कि शक्कर के एकाएक भाव बढऩा निश्चित ही आश्चर्य व्यक्त करता है। 11 अगस्त तक शक्कर का रेट 52 रुपए था, जो पहले से ऑल टाइम हाइ था, इसके बाद 12 रुपए बढ़कर 64 रुपए बुधवार का रेट हो गया है। व्यापारियों के अनुसार बीते सालों में भी शक्कर के रेट बढ़ते-घटते रहे हैं, लेकिन इतने आगे नहीं हुए। शक्कर का औसत भाव 38 से 50 के बीच बीते सालों में रहा है, जबकि औसत भाव 42 से 44 रहा है।

यहां देखने मिलेगा व्यापार पर असर


मिठाई की दुकानें: पेड़ा, बर्फी, गुलाब जामुन, रसगुल्ला आदि की लागत बढ़ेगी।
बेकरी और बिस्किट उद्योग: केक, पेस्ट्री, बिस्किट और अन्य बेकरी उत्पादों की लागत बढ़ सकती है।
आइसक्रीम कारोबार: शक्कर के साथ दूध क्रीम आदि की लागत जुडऩे से उत्पादन लागत बढ़ सकती है।
डेयरी उत्पाद: फ्लेवर्ड मिल्क, लस्सी, मीठी दही और अन्य मीठे उत्पाद प्रभावित होंगे।
चाय-कॉफी होटल रेस्टोरेंट कारोबार: चाय, कॉफी और मीठे पेय की लागत बढऩे से प्रति कप मार्जिन घट सकता है।
कैटरिंग और हलवाई: पार्टी और त्योहारों के बड़े ऑर्डर में कच्चे माल की लागत बढ़ेगी।

क्यों बढ़ रहे शक्कर के रेट


ट्रेड एक्सपर्ट मयंक भारिल्ल के अनुसार शक्कर के स्टॉक में कमी आना इसका प्रमुख कारण है। 2025-26 सीजन में उत्पादन उम्मीद से कम रहा और मिलों के पास उपलब्ध स्टॉक घटा है। इसके अलावा एथेनॉल के लिए गन्ने का एक हिस्सा शक्कर के बजाय एथेनॉल बनाने में जाने से बाजार में शक्कर की उपलब्ध कम हुई है। इसे त्योहारी मांग से भी जोड़कर देखा जा सकता है। अगस्त से नवंबर के बीच ईद, रक्षाबंधन, गणेश चतुर्थी, नवरात्र, दशहरा और दीपावली के कारण चीनी की मांग बढऩे की उम्मीद है, जिससे व्यापारी अभी से स्टॉक बढ़ा रहे हैं। हालांकि, बढ़ते रेट के बीच सरकार ने स्टॉक लिमिट की वाध्यता शुरू कर दी है, जिससे आगामी दिनों में दबी शक्कर निकलने के आसार हैं।