Illegal Sand Mining: डंकनी-शंखनी नदी में पंचायत की जानकारी के बिना खनन किए जाने और ‘एक पीटपास-कई फेरे’ के खेल ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Illegal Sand Mining: दंतेवाड़ा जिले में रेत खनन का खेल अब माफिया राज में तब्दील होता नजर आ रहा है। चारों विकासखंडों में सक्रिय रेत माफिया नियम-कानून को दरकिनार कर अवैध खनन और परिवहन को अंजाम दे रहे हैं। ताजा मामला गीदम विकासखंड के बड़े तुमनार क्षेत्र का है, जहां डंकनी-शंखनी नदी में ग्राम पंचायत को बिना जानकारी दिए लगातार खनन किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार रेत परिवहन में बड़े स्तर पर गड़बड़ी हो रही है। एक ही पीटपास का इस्तेमाल कर कई बार रेत ढोई जा रही है, जिससे शासन को भारी राजस्व हानि हो रही है और अवैध परिवहन को बढ़ावा मिल रहा है।
खनन के लिए बनाए गए रास्तों ने जंगलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। सैकड़ों पेड़ मिट्टी में दब चुके हैं और कई नष्ट होने की कगार पर हैं। इसके बावजूद वन विभाग और खनन विभाग की निष्क्रियता ने उनकी भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नियमों के अनुसार किसी भी पुल से 200 मीटर की दूरी पर ही खनन की अनुमति होती है, लेकिन यहां मात्र 50 मीटर की दूरी पर मशीनों से खुदाई की जा रही है। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि पुल की संरचना और नदी के प्राकृतिक संतुलन के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित विभाग केवल औपचारिक कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रहे हैं, जबकि बड़े स्तर पर चल रहे इस अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक नहीं लगाई जा रही।
खनन और वन विभाग पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। लगातार शिकायतों के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
नदी, जंगल और सरकारी राजस्व को हो रहे नुकसान के बीच अब आम जनता कड़ी कार्रवाई की मांग कर रही है। लोगों का कहना है कि इस अवैध खनन पर रोक लगाकर दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि क्षेत्र को इस माफिया राज से मुक्ति मिल सके।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक इस पूरे मामले में गीदम के एक चर्चित व्यापारी का नाम सामने आ रहा है, जिसे अवैध खनन नेटवर्क का संचालक बताया जा रहा है। आरोप है कि वह पर्दे के पीछे रहकर पूरे तंत्र को नियंत्रित कर रहा है और क्षेत्र में रेत कारोबार पर कब्जा जमाए हुए है।