दंतेवाड़ा

Illegal Mining: बिना अनुमति ब्लास्टिंग और अवैध उत्खनन, प्रशासन ने ठोका 55 लाख से ज्यादा का जुर्माना

Illegal Mining: अवैध खनन पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, जांच में खदान क्षेत्र से बाहर उत्खनन और बिना वैध दस्तावेज ब्लास्टिंग का खुलासा हुआ।

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अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई (Photo Source- Patrika)

Illegal Mining: दंतेवाड़ा जिले में अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में खनिज उडऩदस्ता दल एवं राजस्व अमले की संयुक्त टीम ने बड़ी अनियमितता उजागर करते हुए कार्रवाई की है।

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Illegal Mining: खदान क्षेत्र में ब्लास्टिंग का कार्य

मिली जानकारी के अनुसार, मेसर्स टी. रमेश, निवासी भद्राचलम (तेलंगाना) को ग्राम जावंगा, तहसील गीदम स्थित खसरा क्रमांक 287, रकबा 1.40 हेक्टेयर में साधारण पत्थर खदान का पट्टा 1 मार्च 2013 से 31 मार्च 2033 तक स्वीकृत है। 18 फरवरी 2026 को खदान क्षेत्र में ब्लास्टिंग का कार्य किया गया जिसका प्रभाव लगभग 500 मीटर दूर स्थित प्राथमिक शाला बड़े पनेरा (कोसापारा) तक देखा गया, जहां पत्थर गिरने की पुष्टि हुई।

घटना के बाद अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) गीदम, तहसीलदार गीदम एवं खनिज विभाग की संयुक्त टीम ने जांच की। जांच के दौरान खदान संचालक और ब्लास्टर मौके पर मौजूद नहीं मिले तथा ब्लास्टिंग से संबंधित वैध दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं किए गए। साथ ही खदान क्षेत्र के सीमा चिन्ह भी सुरक्षित नहीं पाए गए।

स्वीकृत क्षेत्र से बाहर उत्खनन का खुलासा

सीमांकन प्रतिवेदन के अनुसार, खदान क्षेत्र से बाहर पूर्व दिशा में 0.18 हेक्टेयर भूमि पर अवैध उत्खनन किया गया था। जांच में लगभग 10,800 घनमीटर साधारण पत्थर का अवैध खनन सामने आया। इस गंभीर अनियमितता पर तत्काल प्रभाव से खदान संचालन बंद करा दिया गया।

Illegal Mining: 55 लाख से अधिक का जुर्माना

खदान पट्टेदार द्वारा खान एवं खनिज (विकास तथा विनियमन) अधिनियम 1957 की धारा 21(4) का उल्लंघन पाए जाने पर धारा 21(5) के तहत 55,18,800 रुपए का अर्थदंड अधिरोपित किया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना वैध अनुमति के खनन, परिवहन या भंडारण दंडनीय अपराध है। भविष्य में इस प्रकार की गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सरकारी राजस्व को नुकसान

दंतेवाड़ा जिले सहित पूरे छत्तीसगढ़ में खनिज संसाधनों की प्रचुरता है, लेकिन इसके साथ अवैध खनन की समस्या भी लंबे समय से बनी हुई है। पत्थर, रेत और अन्य खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण से न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान होता है, बल्कि पर्यावरण और स्थानीय समुदायों पर भी इसका गंभीर असर पड़ता है।

भारत में खनन गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए Mines and Minerals (Development and Regulation) Act, 1957 (MMDR Act) लागू है। इसके तहत खदान संचालन, उत्खनन की सीमा, पर्यावरणीय स्वीकृति और सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य होता है।

Updated on:
24 Mar 2026 08:56 am
Published on:
24 Mar 2026 08:53 am
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