
Kirandul Project: एनएमडीसी की बैलाडीला आयरन ओर माइंस, किरंदुल कॉम्प्लेक्स ने सामुदायिक विकास एवं ग्रामीण उन्नयन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए 12वें सीएसआर इंडिया अवार्ड 2026 में गोल्ड अवार्ड प्राप्त किया है। यह सम्मान ‘सामुदायिक विकास एवं ग्रामीण उन्नयन’ श्रेणी के अंतर्गत दिया गया, जिससे पूरे परियोजना क्षेत्र में खुशी की लहर है। यह पुरस्कार 13 मई 2026 को नई दिल्ली के रेडिसन ब्लू द्वारका में ग्रीनटेक फाउंडेशन द्वारा आयोजित भव्य समारोह में प्रदान किया गया।
कार्यक्रम में ग्रीनटेक फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं सीईओ कमलेश्वर शरण मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। साथ ही एनटीपीसी लिमिटेड के परियोजना प्रमुख जगदीश चंद्र शास्त्री एवं आर.के. दुबे की भी विशेष उपस्थिति रही। समारोह के दौरान बीआईओएम किरंदुल कॉम्प्लेक्स को उत्कृष्ट सामाजिक दायित्वों के निर्वहन और ग्रामीण विकास कार्यों के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया। परियोजना की ओर से मुख्य महाप्रबंधक (उत्पादन) के.पी. सिंह एवं प्रबंधक (सिविल) सीएसआर सुखराम गावड़े ने अवार्ड ग्रहण किया।
परियोजना प्रमुख एवं अधिशासी निदेशक रविंद्र नारायण ने इस उपलब्धि पर अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि किरंदुल परियोजना आगे भी सामुदायिक विकास और ग्रामीण उन्नयन के क्षेत्र में इसी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी। यह सम्मान परियोजना की सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति समर्पण का प्रतीक है, साथ ही क्षेत्रीय विकास और ग्रामीण समुदायों के उत्थान में किए जा रहे कार्यों की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान भी दर्शाता है।
बता दें एनएमडीसी की NMDC Limited की बैलाडीला आयरन ओर माइंस (बीआईओएम), किरंदुल कॉम्प्लेक्स लंबे समय से खनन गतिविधियों के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों को भी प्राथमिकता देता रहा है। दंतेवाड़ा जिले के दूरस्थ और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में संचालित यह परियोजना शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, कौशल विकास और ग्रामीण आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के जरिए स्थानीय समुदायों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है।
परियोजना द्वारा आसपास के गांवों में स्कूलों के उन्नयन, स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन, स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने, युवाओं को रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण देने और महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़े कई कार्यक्रम संचालित किए जाते रहे हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और सामुदायिक भवनों जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।