
IPL में छाया बस्तर का स्वाद (photo source- Patrika)
Chhattisgarh Food Culture: बस्तर अंचल की पारंपरिक खाद्य संस्कृति अब राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना रही है। राजधानी रायपुर में आयोजित इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) मुकाबलों के दौरान दंतेवाड़ा जिले की प्रगति स्व सहायता समूह से जुड़ी चंदा दीदी ने अपने पारंपरिक व्यंजनों से ऐसा स्वाद परोसा कि विराट कोहली और क्रुणाल पंड्या जैसे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर भी बस्तरिया जायकों के मुरीद हो गए।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ी चंदा दीदी ने आईपीएल के दौरान खिलाडिय़ों के लिए विशेष पारंपरिक व्यंजन तैयार किए। इनमें महुआ से बने पौष्टिक लड्डू, कोदो-कुटकी और बाजरे से तैयार स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थ तथा बस्तर की प्रसिद्ध तीखी ‘चापड़ा चटनी’ शामिल रही। खिलाडिय़ों ने इन व्यंजनों के अनोखे स्वाद और गुणवत्ता की जमकर सराहना की। बताया जा रहा है कि विराट कोहली, रजत पाटीदार और स्वप्निल सिंह ने विशेष रूप से बस्तरिया व्यंजनों में रुचि दिखाया।
चंदा दीदी पिछले कई वर्षों से बिहान योजना से जुडक़र स्वरोजगार के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं। वे न केवल खुद आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं, बल्कि अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बनकर उभरी हैं।
जिला मिशन प्रबंधक इकाई के डीपीएम आजीविका नितेश कुमार देवांगन के अनुसार, चंदा दीदी को इस वर्ष ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट’ में 10 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें फूड प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और आधुनिक मार्केटिंग तकनीकों की जानकारी दी जाएगी, जिससे उनके उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
चंदा दीदी का हुनर पहले भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका है। इससे पहले वे अपने प्रसिद्ध महुआ लड्डू का स्वाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी चखा चुकी हैं। उनकी पाक कला और पारंपरिक उत्पादों की गुणवत्ता की सराहना कई मंचों पर हो चुकी है। अब आईपीएल जैसे बड़े मंच पर मिली पहचान ने बस्तर की पारंपरिक खाद्य विरासत को नई पहचान दिलाई है।
बस्तर का वेस्ट-अब बनेगा बेस्ट
छत्तीसगढ़ में अब छिंद के बीजों से कैफीन मुक्त हर्बल कॉफी तैयार करने की नई पहल शुरू की गई है। यह स्वास्थ्यवर्धक पेय न केवल लोगों को कॉफी का नया विकल्प देगा, बल्कि वन उत्पादों से जुड़े ग्रामीणों और महिलाओं के लिए रोजगार और आय बढ़ाने का माध्यम भी बनेगा। बस्तर के नैसर्गिक सौंदर्य और समृद्ध संसाधनों के बीच अब एक नई और सुगंधित क्रांति आकार ले रही है, जिसका श्रेय दंतेवाड़ा जिले के बचेली निवासी युवा उद्यमी विशाल हालदार को जाता है। बीकॉम और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की शिक्षा प्राप्त करने वाले विशाल ने अपनी जड़ों से जुड़े रहने और कुछ नया करने की चाह में छिंद (खजूर की एक स्थानीय प्रजाति) के उन बीजों से हर्बल कॉफी तैयार की है, जिन्हें अब तक बस्तर में पूरी तरह व्यर्थ समझा जाता था।
इस अभिनव प्रयोग के पीछे विशाल का उद्देश्य न केवल बेकार पड़े प्राकृतिक संसाधनों का सदुपयोग करना है, बल्कि कॉफी के उन शौकीनों को एक स्वस्थ विकल्प प्रदान करना है जो स्वाद तो चाहते हैं लेकिन कैफीन के दुष्प्रभावों से बचना चाहते हैं। विशाल का यह सफर करीब दो वर्षों के गहन शोध और प्रयोगों का परिणाम है, जिसमें उन्होंने इंटरनेट की मदद और स्थानीय समझ का बखूबी तालमेल बिठाया है। विशाल की इस नवाचार को इनोवेशन महाकुंभ में प्रथम स्थान मिला, जिसके लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के द्वारा सम्मानित किया गया।
Published on:
11 May 2026 11:55 am
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