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Youth Inspiration: 500 रुपए में महीना काटने वाले मनीष बने डॉक्टर, गरीबी और संघर्ष पर लिखी सफलता की नई कहानी

Youth Inspiration: अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज से MBBS की डिग्री हासिल कर उन्होंने डॉक्टर बनने का सपना पूरा किया और युवाओं के लिए प्रेरणा बने।

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Youth Inspiration (photo source- Patrika)

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Youth Inspiration: कहते हैं कि इंसान वैसा ही बनता है जैसा वह सोचता है। इस बात को सच कर दिखाया है फरसगांव ब्लॉक के ग्राम पंचायत बोरगांव (पूर्वी) निवासी डॉ. मनीष साहू ने। तमाम अभावों, संघर्षों और असफलताओं को पीछे छोड़ते हुए उन्होंने आरएसडीकेएस शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, अंबिकापुर से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर डॉक्टर बनने का सपना साकार किया है।

Youth Inspiration: जिद और मेहनत ने दिलाई सफलता

मनीष की जिद थी कि उन्हें मेडिकल कॉलेज के अलावा कुछ और स्वीकार नहीं। लगातार मेहनत, नियमित पढ़ाई, शिक्षकों के मार्गदर्शन और खुद की बनाई रणनीति के दम पर उन्होंने आखिरकार सफलता हासिल की और डॉक्टर बनकर उभरे।

असफलताओं से नहीं मानी हार

मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के दौरान मनीष कई बार कुछ अंकों से चयन से चूक गए। मानसिक दबाव और निराशा ने उन्हें तोडऩे की कोशिश की, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। कठिन समय में उन्होंने भगवत गीता से प्रेरणा ली। उनका कहना है कि गीता ने उन्हें सकारात्मक सोच, अनुशासन और धैर्य बनाए रखने की ताकत दी।

मनीष जब छठी कक्षा में थे, तभी उनके पिता स्वर्गीय रामकुमार साहू का निधन हो गया। छोटी उम्र में पिता को खोने के बाद परिवार पर आर्थिक संकट गहरा गया, लेकिन उनकी मां ने हिम्मत नहीं हारी। मनीष बताते हैं कि उन्होंने वह दौर भी देखा, जब पूरे महीने का खर्च सिर्फ 500 रुपये में चलाना पड़ता था। कठिन हालात के बावजूद उनकी मां ने बच्चों के सपनों को कभी टूटने नहीं दिया।

औसत छात्र से डॉक्टर बनने तक का सफर

स्कूल के दिनों में मनीष खुद को एक औसत छात्र मानते थे। 12वीं के बाद वे अपने भविष्य को लेकर असमंजस में थे और एक स्थानीय कॉलेज में दाखिला भी लिया, लेकिन उनका मन वहां नहीं लगा। एक महीने बाद उन्होंने डॉक्टर बनने का फैसला किया और यही निर्णय उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।

Mother's Day: बस्तर के युवाओं के लिए प्रेरणा बने मनीष

डॉ. मनीष साहू का कहना है कि जीवन में सबसे जरूरी है निर्णय लेना। उनका मानना है कि यदि निर्णय सही हुआ तो सपना पूरा होगा और गलत हुआ तो अनुभव मिलेगा। वे अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपनी मां के त्याग, विश्वास और संघर्ष को देते हैं।

आज बोरगांव ही नहीं, बल्कि पूरा फरसगांव क्षेत्र डॉ. मनीष साहू की इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है। उनकी कहानी यह साबित करती है कि मजबूत इरादों और कड़ी मेहनत के सामने गरीबी और अभाव भी हार मान लेते हैं। यह सफलता बस्तर के युवाओं के लिए प्रेरणा और उम्मीद की नई मिसाल बन गई है।