School Book Scam: दंतेवाड़ा में शिक्षा विभाग के निर्देशों के बावजूद निजी स्कूल महंगी किताबें बिना पक्की रसीद के बेच रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारी चुप हैं, जबकि शिक्षा मंत्री ने सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।
School Book Scam: दंतेवाड़ा जिले में शिक्षा विभाग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद निजी स्कूलों द्वारा महंगी किताबों की बिक्री धड़ल्ले से जारी है। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं। हाल ही में शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने महंगी किताबें बेचने वाले निजी स्कूलों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी थी, इसके बावजूद नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है।
इन किताबों की अधिक संख्या के कारण बच्चों के बस्ते का वजन काफी बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे छोटे बच्चों में दीर्घकालिक शारीरिक समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। वहीं, अभिभावकों का कहना है कि भारी सिलेबस बच्चों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव भी डालता है, जो नई शिक्षा नीति के ‘बस्ते का बोझ कम करने’ के उद्देश्य के विपरीत है।
निर्मल निकेतन स्कूल में आईसीएससी पाठ्यक्रम संचालित किया जा रहा है, जिसके तहत निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें अनिवार्य कर दी जाती हैं। ये किताबें खुले बाजार में आसानी से उपलब्ध नहीं होतीं, जिससे अभिभावकों को मजबूरन स्कूल से ही खरीदना पड़ता है।
जानकारों का कहना है कि सीबीएसई व छत्तीसगढ़ बोर्ड की किताबें क्रमश: एनसीईआरटी और एससीईआरटी द्वारा प्रकाशित होती हैं, जो सस्ती होने के साथ-साथ बाजार में आसानी से उपलब्ध रहती हैं। इसके विपरीत, आईसीएससी पाठ्यक्रम में महंगी और सीमित उपलब्धता वाली किताबों का चलन अधिक है।
जिला मुख्यालय स्थित निजी कॉन्वेंट निर्मल निकेतन स्कूल पर आरोप है कि यहां इस वर्ष भी निजी प्रकाशकों की किताबें बेची जा रही हैं। बताया जा रहा है कि स्कूल प्रबंधन विधिवत प्रिंटेड रसीद देने के बजाय साधारण हस्तलिखित पर्ची पर ही भुगतान का उल्लेख कर पालकों को थमा रहा है।
इतना ही नहीं, ऑनलाइन भुगतान भी स्कूल के आधिकारिक खाते में लेने के बजाय निजी क्यूआर कोड के माध्यम से लिया जा रहा है, जिससे लेन-देन का रिकॉर्ड छिपाया जा सके। इस प्रक्रिया से सरकार को जीएसटी व अन्य करों के रूप में मिलने वाले राजस्व को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।