
Datia News :मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह की जीत केवल उगमीदवार की व्यक्तिगत लोकप्रियता का परिणाम नहीं है। इसके पीछे पार्टी नेतृत्व, स्थानीय संगठन, भाजपा के भीतर असंतोष, सामाजिक समीकरण, भितरघात समेंत कई कारक शामिल हैं। यही कारण है कि, आजाद समाज पार्टी के दामोदर यादव को 22 हजार वोट मिलने के बाद भी कांग्रेस ने विजय हासिल की है। इनके अलावा ऐसे पांच और कारक हैं जो प्रभावी साबित हुए है..।
-भाजपा में टिकट को लेकर असंतोष, गुटबाजी, भितरघात ने कांग्रेस को लाभ पहुंचाया, यही जीत का बड़ा कारण रहा है।
-कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह की स्थानीय स्वीकार्यता भाजपा प्रत्याशी की तुलना में ज्यादा थी। वे दतिया के ही हैं और स्थानीय मुद्दों की समझ रखते हैं, इसलिए जनता ने उन्हें चुना।
-कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह, पूर्व विधायक प्रियव्रत सिंह के मामा हैं। पूरी क्षत्रिय लॉबी दिग्विजय सिंह, अजय सिंह, जयवर्धन सिंह आदि ने मतभेद भुलाकर चुनाव में भरपूर मदद की। अवधेश नायक ने ब्राह्मण वोटर्स और विधायक फूल सिंह बरैया ने एससी के वोट तो नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने अजजा वोटर्स को एकजुट किया।
-कांग्रेस का दतिया में बूथ प्रबंधन भी बेहतर रहा। चुनाव अभियान को भी स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित रखा गया।
-कांग्रेस के लिए दतिया की जीत मनोबल बढ़ाने वाली है। इससे कार्यकर्ताओं में आगामी चुनावों के लिए ज्यादा जोश भरेगा और ज्यादा लोग जुड़ेंगे। पार्टी में भी एकजुटता का संदेश गया।
प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में विजयपुर में विजय के करीब एक साल नौ महीने बाद ढोल ढमाकों की गूंज सुनाई दी। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने दतिया में कांग्रेस की जीत को भाजपा के अहंकार, रिवेंज, भ्रष्टाचार और सवा के दुरुपयोग की राजनीति के प्रति जनता का प्रतिकार बताया है। कहा, दतिया की जनता ने एमपी की राजनीति में बदलाव का शंखनाद किया है। पटवारी ने दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए कहा कि, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और सपा के प्रदेश संगठन को भी जीत का श्रेय जाता है। जेन-जी के आंदोलन को भी दतिया की जनता ने सपोर्ट किया। उन्होंने कहा कि, भाजपा नेताओं ने दतिया में कैंप जमा रखा था। इसके बावजूद जनता ने भाजपा को नकार दिया।