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दतिया उपचुनाव : भाजपा ने 291 बूथों पर बनाया ‘वार रूम’, कांग्रेस ने जातीय समीकरण साधने उतारे दिग्गज

Datia By-Election : दतिया विधनासभा उपचुनाव में बूथ बनेंगे रणक्षेत्र, बिरादरी बनेगी ब्रह्मास्त्र। चुनाव की अंतिम लड़ाई संगठन की ताकत पर निर्भर करेगी।
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Datia By-Election
Datia By-Election (उपचुनाव में बूथ होंगे रणक्षेत्र और बिरादरी ब्रह्मास्त्र Photo Source- Patrika)

Datia News :मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने जा रहा उपचुनाव अब भाषणों और बड़ी सभाओं से आगे निकलकर बूथ और बिरादरी की लड़ाई में तब्दील हो गया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों इस चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न मानते हुए अपनी पूरी संगठनात्मक ताकत मैदान में उतार चुके हैं। एक तरफ भाजपा ने 291 मतदान केंद्रों पर बूथ प्रभारियों की नियुक्ति कर चुनावी वार रूम खड़ा कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी हर बड़े सामाजिक वर्ग के लिए अलग-अलग नेताओं की जिम्मेदारी तय कर दी है। अब चुनावी मुकाबला इस बात पर टिक गया है कि, मतदान वाले दिन कौन सा दल अपने समर्थक मतदाताओं को बूथ तक अधिक संख्या में पहुंचा पाता है।

भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के लिए पार्टी ने विधानसभा के सभी 291 मतदान केंद्रों पर एक - एक प्रभारी तैनात कर दिया है। पूरे इलाके को 21 शक्ति केंद्रों में बांटकर प्रत्येक शक्ति केंद्र की कमान विधायक और पूर्व विधायकों को सौंपी गई है। इनकी जिम्मेदारी सिर्फ प्रचार तक सीमित नहीं है, बल्कि बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं का समन्वय, मतदाताओं से व्यक्तिगत संपर्क और मतदान प्रतिशत बढ़ाने तक है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि, दतिया जैसे उपचुनाव में बूथ प्रबंधन ही जीत - हार का सबसे बड़ा आधार बनेगा।

भाजपा की तैयारी

इस बार भाजपा की रणनीति का सबसे अहम पहलू जातीय समीकरण है। विधानसभा के छह मंडलों में जिस समाज का प्रभाव अधिक है, वहां उसी समाज के प्रभावशाली नेताओं को सक्रिय किया गया है। ब्राह्मण मतदाताओं के बीच पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, मंत्री राकेश शुक्ला, गोपाल भार्गव और शैलेंद्र बरुआ मोर्चा संभाले हुए हैं। क्षत्रिय समाज में मंत्री प्रद्यु्न सिंह तोमर और अन्य वरिष्ठ नेता सक्रिय हैं, जबकि निर्णायक माने जा रहे कुशवाहा समाज को साधने के लिए मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा, सांसद भारत सिंह कुशवाहा और जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाहा लगातार जनसंपर्क कर रहे हैं। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, मंत्री दिलीप अहिरवार और सांसद संध्या राय को जिम्मेदारी दी गई है।

भाजपा की चुनाव संचालन समिति में पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, विधायक प्रदीप अग्रवाल, सांसद संध्या राय, जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाहा समेत कई वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया है। नामांकन के बाद से ही प्रदेश के कई मंत्री और संगठन पदाधिकारी दतिया में डेरा डाले हुए हैं, जिससे साफ है कि पार्टी इस सीट पर कोई जोखिम लेने के मूड में दिखाई नहीं दे रही है।

भाजपा का चुनावी गणित

-291 मतदान केंद्रों पर बूथ प्रभारी
-21 शक्ति केंद्र, हर केंद्र पर विधायक या पूर्व विधायक
-6 मंडलों में जातीय समीकरण के हिसाब से जिम्मेदारी
-प्रदेश के कई मंत्री और संगठन पदाधिकारी दतिया में डेरा डाले

कांग्रेस की तैयारी

कांग्रेस ने भी मुकाबले को बराबरी का बनाने के लिए अपना पूरा राजनीतिक कुनबा मैदान में उतार रखा है। प्रत्याशी घनश्याम सिंह के समर्थन में अलग-अलग समाजों के लिए अलग-अलग चेहरों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। ब्राह्मण समाज में पी.पी. शर्मा, हेमंत कटारे, राकेश चतुर्वेदी और प्रवीण पाठक सक्रिय हैं। क्षत्रिय मतदाताओं के बीच डॉ. गोविंद सिंह, जयवर्धन सिंह, राहुल सिंह और नीटू सिकरवार प्रचार कर रहे हैं। अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग में फूल सिंह बरैया, महेंद्र बौद्ध, मेवाराम जाटव और सुरेश राजे को जिम्मेदारी मिली है। ओबीसी मतदाताओं तक पहुंचने के लिए सचिन यादव, अशोक सिंह, दिनेश गुर्जर और लखन सिंह को लगाया गया है, जबकि मुस्लिम मतदाताओं के बीच आरिफ मसूद प्रचार की कमान संभाल रहे हैं।

उपचुनाव इसलिए भी दिलचस्प हो गया है क्योंकि, यहां उम्मीदवारों से ज्यादा चर्चा दोनों दलों की संगठनात्मक ताकत की हो रही है। कांग्रेस सामाजिक समीकरणों और स्थानीय असंतोष को अपने पक्ष में बदलने की कोशिश में है। ऐसे में मतदान के दिन सबसे बड़ी परीक्षा कार्यकर्ताओं की होगी।

कांग्रेस की रणनीति

-हर प्रमुख समाज के लिए अलग वरिष्ठ नेता
-ब्राह्मण, क्षत्रिय, ओबीसी, एससी- एसटी और मुस्लिम मतदाताओं पर अलग फोकस
-विधायक, पूर्व मंत्री और राज्यसभा सांसद तक चुनावी मोर्चे पर सक्रिय

Updated on:
16 Jul 2026 09:28 am
Published on:
16 Jul 2026 09:23 am