दतिया

2000 रुपए से ऊपर UPI चार्ज का असर, दुकानों से गायब QR स्कैनर, दतिया के व्यापारियों ने जताई चिंता

UPI Above 2000 Charge: यूपीआई सिस्टम में हो रहा बदलाव का असर दतिया में देखने को मिल रहा है। नुकसान से बचने के लिए दुकानदार अपनी दुकान से QR Scanner हटा रहे है।
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Sep 18, 2026
merchants removing qr scanners upi above 2000 charge
UPI Above 2000 Charge: दतिया में दुकानों से गायब हो रहे QR Scanners (फोटो सोर्स- Patrika)

UPI Above 2000 Charge: यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित शुल्क को लेकर व्यापारियों में चिंता बढ़ने लगी है। 15 अक्टूबर से निर्धारित श्रेणी के 2,000 रुपए से अधिक के मर्चेट भुगतान पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू होने की चर्चा के बीच इसका असर दतिया के बाजार में अभी से दिखाई देने लगा है।

दतिया में व्यपारियों ने क्यूआर कोड से लेना बंद किया पेमेंट

मध्य प्रदेश के दतिया में व्यापारियों के अनुसार शुल्क लागू होने से पहले ही शहर के करीब 8 से 10 प्रतिशत दुकानदारों ने यूपीआई बारकोड से भुगतान लेना बंद कर दिया है। व्यापारियों का कहना है कि बड़े डिजिटल भुगतान पर लागत बढने से छोटे कारोबारियों के सीमित मुनाफे पर सीधा असर पड़ेगा। प्रस्तावित व्यवस्था में 2,000 रुपए से अधिक के पात्र व्यापारी भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगेगा और इस शुल्क पर 18 प्रतिशत जीएसटी भी देय होगा। हालांकि यह शुल्क सीधे ग्राहक से वसूलने की अनुमति नहीं होगी। 75 हजार रुपए या उससे अधिक के लेनदेन पर एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपए बताई गई है।

पहले एसडीआर बनेगा उसके ऊपर जीएसटी अलग से जुड़ेगी

दतिया शहर में कई दुकानदारों ने शुल्क की आशंका के चलते यूपीआई बारकोड हटाना शुरू कर दिया है। व्यापारियों के मुताबिक 10 हजार रुपए के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत की दर से 40 रुपए एमडीआर बनेगा। इसके ऊपर जीएसटी अलग से जुडने से लागत और बढ़ेगी। किराना, कपड़ा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कारोबार में 2,000 रुपए से अधिक के बिल आम हैं। अब तक यूपीआई से भुगतान लेने में अतिरिक्त लागत नहीं थी, इसलिए ग्राहक और दुकानदार दोनों इसे सुविधाजनक मानते थे। अब बड़े भुगतान पर शुल्क लगने की स्थिति में व्यापारी नकद भुगतान को प्राथमिकता देंगे।

मुनाफे पर सीधा असर पड़ेगा

प्रस्तावित व्यवस्था में 2,000 रुपए से अधिक के पात्र व्यापारी भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगेगा और इस शुल्क पर 18 प्रतिशत जीएसटी भी देय होगा। हालांकि यह शुल्क सीधे ग्राहक से वसूलने की अनुमति नहीं होगी। 75 हजार रुपए या उससे अधिक के लेनदेन पर एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपए बताई गई है।

व्यापारी बोले नुकसान उठाना पड़ेगा

  • किराना कारोबार में ग्राहक अक्सर एक साथ बड़ी खरीदारी करते हैं और भुगतान यूपीआई से करते हैं। 2,000 रुपए से अधिक के भुगतान पर एमडीआर लगने से हर लेनदेन की लागत बढ़ेगी। अतिरिक्त शुल्क का असर सीधे कमाई पर पड़ सकता है।- वीरेंद्र गुप्ता, किराना व्यापारी
वीरेंद्र गुप्ता, किराना व्यापारी (फोटो सोर्स- Patrika)
  • इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार में ज्यादातर बिल 2,000 रुपए से ऊपर होते हैं। यूपीआई के जरिए भुगतान करना ग्राहकों के लिए आसान और दुकानदार के लिए सुरक्षित माध्यम था। अब प्रत्येक पात्र लेनदेन पर एमडीआर और उस पर जीएसटी की लागत जुड़ेगी।-अमन त्रिपाठी, इलेक्ट्रॉनिक कारोबार
अमन त्रिपाठी, इलेक्ट्रॉनिक कारोबार (फोटो सोर्स- Patrika)
  • कपड़ों की खरीदारी में 2,000 रुपए से अधिक के बिल सामान्य हैं। ऐसे में एमडीआर का असर हमारे कारोबार पर ज्यादा दिखाई देगा। बड़ी संख्या में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त लागत जुडने से कुल खर्च बढ़ेगा।- दीपक यादव, कपड़ा कारोबारी
दीपक यादव, कपड़ा कारोबारी (फोटो सोर्स- Patrika)
  • डेयरी कारोबार में डिजिटल लेनदेन तेजी से बढ़े हैं। बड़ी राशि के भुगतान पर एमडीआर लगने से कारोबार की लागत बढ़ेगी। व्यापारी ग्राहक पर यह शुल्क नहीं डाल सकता। इसलिए अतिरिक्त खर्च खुद ही उठाना पड़ेगा।- अजय सिंह, डेरी संचालक
अजय सिंह, डेरी संचालक (फोटो सोर्स- Patrika)
Updated on:
18 Sept 2026 09:50 am
Published on:
18 Sept 2026 09:50 am