बर्बाद हो गया रामसेवक कर्ण का परिवार, घर में न पत्नी न ही बच्चा बचा
दतिया. शादी के 22 साल बाद तमाम मन्नतों व इलाज के बाद रामसेवक कर्ण की पत्नी गर्भवती हुई। बेहोशी व उल्टी हुई । एंबुलेंस देरी से पहुंची और अस्पताल पहुंचने से पहले ही पत्नी ने दम तोड़ दिया। इसके साथ ही अजन्मा बच्चा भी मौत की गोद में सो गया।
जिले के भांडेर अनुभाग के सालोन बी निवासी रामसेवक कर्ण(45) व कमलेश (40) की शादी 22 साल पहले हुई थी। किसी वजह से दंपती के कोई संतान नहीं हुई। इधर-उधर मन्नतें मांगने व इलाज के बाद करीब नौ माह पहले कमलेश गर्भवती हुई। मंगलवार की रात करीब 11 बजे उसकी अचानक तबीयत खराब हो गई। उल्टियां होने लगी बेहोशी आ गई। परेशानी को देख पति रामसेवक ने 108 एंबुलेंस को कॉल किया।
जवाब मिला कि 15 मिनट में एंबुलेंस पहुंच जाएगी लेकिन 3 घंटे इंतजार किया। इस दौरान दो तीन बार और कॉल किया पर कोई जबाव नहीं मिला। करीब तीन घंटे देरी से पहुंची एंबुलेंस से प्रसूता को लेकर दतिया आ रहे थे तभी तडक़े करीब 4 बजे शहर में प्रवेश के दौरान ही कमलेश ने दम तोड़ दिया। उसकी मौत के साथ ही गर्भ में पल रहे 9 माह के भ्रूण की भी मौत हो गई। रामसेवक का कहना है कि 22 साल पहले उसका विवाह हुआ था। बच्चा गर्भ में पल रहा था लेकिन एंबुलेंस चालक की लापरवाही ने उसका घर बर्बाद हो गया। उसने बताया कि पोस्टमार्टम के दौरान पता चला कि कमलेश के गर्भ में बेटा था उसका वजन 3 किलो निकला। प्रसूता भी स्वस्थ थी। उसका वजन 62 किलो था। हैरानी की बात है कि प्रसूता को क्या ऐसी दिक्कत हुई कि उसे बेहोशी आई । इस घटना से रामसेवक पूरी तरह टूट चुका है।
मौत के बाद भी मिली परेशानी
रामसेवक ने बताया कि जब उसकी पत्नी और बेटे की मौत हो गई। पोस्टमार्टम हो गया तो शव को गांव ले जाना था इसके लिए शव वाहन बुलाया लेकिन 3 घंटे इंतजार करना पड़ा। फिर भी नहीं आया तो उसे निजी एंबुलेंस में 2000 रुपए खर्च कर शवों को गांव ले जाना पड़ा।
नर्सों ने की थी की लापरवाही
मृतका कमलेश के पति ने बताया कि जिस वक्त मंगलवार की रात करीब पत्नी को बेहोशी आई थी उसी वक्त वह सालोन बी स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र पर गया। यहां एएनएम ड्यूटी पर थी उसने मिन्नतें की लेकिन कोई उसके घर पर पत्नी को देखने नहीं आईं। अगर वे भी वक्त पर आ जाती तो हो सकता है उसकी पत्नी की जान बच जाती।
फिलहाल यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है पर भांडेर के बीएमओ व अन्य जिम्मेदारों से बात कर पता करता हूं कि आखिर किसकी लापरवाही है।
डॉ आरबी कुरेले, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी