
Pitambara Pith : दतिया का मां पीतांबरा पीठ देश-दुनिया में शक्ति उपासना, तंत्र साधना और ऐतिहासिक रहस्यों के प्रमुख केंद्र के रूप में प्रसिद्ध है। यहां मां बगलामुखी (पीतांबरा माई), मां धूमावती और मां महात्रिपुर सुंदरी विराजमान हैं। भक्तों को मां पीतांबरा और मां धूमावती के प्रत्यक्ष दर्शन होते हैं, जबकि मां महात्रिपुर सुंदरी की पूजा यंत्र रूप में सीमित साधक करते हैं। नवरात्रि के पहले दिन रविवार को माता के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़े। मां बगलामुखी को शत्रुओं पर विजय और संकटों से मुक्ति की कामना से पूजा जाता है। मंदिर से जुड़ा ऐतिहासिक प्रसंग 1962 के भारत-चीन युद्ध का है, जब देश की रक्षा व विजय की कामना के लिए यहां 7 दिनों तक विशेष हवन- अनुष्ठान किया। माना जाता है, इसके बाद चीनी सेना वापस लौटी।
शारदीय नवरात्रि में मां भगवती की आराधना चल रही है। प्रदेशभर के दुर्गा मंदिरों, शक्ति पीठों पर श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ रहा है। इनमें दतिया का पीतांबरा पीठ भी शामिल है। यहां नवरात्रि के पहले दिन यानि रविवार को 50 हजार से ज्यादा भक्तों ने माता के दर्शन किए।
पं. नरेंद्र शास्त्री बताते हैं कि पीठ से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार पूज्य पाद स्वामीजी महाराज ने यहां महाविद्याओं की स्थापना की थी। 1935 में पीठ परिसर में मां बगलामुखी को विराजमान कराया था। भारत-चीन युद्ध के समय जब देशपर संकट आया तो हर किसी को मां बगलामुखी की याद आई। बताया जाता है कि तत्कालीन केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर पीतांबरा पीठ पर विशेष अनुष्ठान शुरु किया गया। स्वामीजी के मार्गदर्शन में 51 ब्राह्मणों ने मां बगलामुखी का आव्हान किया। खास बात यह है कि अनुष्ठान के कुछ ही दिनों बाद चीनी सैनिक भारत से लौट गए थे।
मां पीतांबरा को मीठा व मां धूमावती को समोसा, कचौरी व नमकीन का प्रसाद चढ़ाया जाता है। आरती व दर्शन नियम: मां पीतांबरा की आरती सुबह 7 व शाम 7 बजे और नवरात्रि में रात 9:30 बजे होती है। मां धूमावती के पट सुबह- शाम 8 बजे 10 मिनट खुलते हैं।
सड़क मार्ग: राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर पडऩे वाला दतिया ग्वालियर, झांसी, कानपुर, जयपुर, इंदौर से सड़क परिवहन से जुड़ा हुआ है।
रेल मार्ग: मां पीतांबरा पीठ दतिया रेलवे स्टेशन से लगभग 3 किलोमीटर दूर है।
हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा ग्वालियर है। यहां से दतिया की दूरी लगभग 75 किलोमीटर है।