Rajasthan News : बसवा कस्बे के पास करनावर गांव में श्याम बाबा के भंडारे में 5000 लीटर दूध की खीर व 4000 किलो आटे के पुए बनाए गए।
दौसा। बसवा कस्बे के पास करनावर गांव में अरावली पहाड़ियों के नीचे बने प्रसिद्ध धार्मिक स्थल सांवलिया धाम के 51वें विष्णु महायज्ञ के समापन पर श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। श्याम बाबा के भंडारे में 5000 लीटर दूध की खीर व 4000 किलो आटे के पुए बनाए गए।
महंत श्यामसुंदर जैमन ने बताया कि 28 अगस्त से चल रही श्रीमद् भागवत कथा व विष्णु महायज्ञ का समापन शुक्रवार दोपहर पूर्णाहुति के साथ किया गया। लोगों ने यज्ञ में सामूहिक पूर्णाहुति दी। करीब 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने श्याम बाबा के दरबार में पहुंचकर पंगत में प्रसादी पाई। प्रसादी तैयार करने के लिए गुरुवार शाम से ही करीब 70 हलवाइयों की टीम ने कार्य करना शुरू कर दिया।
शुक्रवार शाम तक हलवाई प्रसादी तैयार करने में जुटे रहे। प्रसाद में खीर बनाने के लिए सुबह से ही आसपास के दर्जनों गांव से दूध एकत्र किया गया। उसके बाद कई भट्टियों पर 5000 लीटर दूध की खीर, 4000 किलो आटे के पुए व करीब 10 क्विंटल दाल की सब्जी बनाई गई। खीर, पुए व दाल को ट्रैक्टर की ट्रॉलियों में भरा गया। मेले में प्रसाद लेने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
करनावर गांव के आसपास बांदीकुई ,राजगढ़, बसवा, फुलेला, दौसा, अलवर सहित अन्य दर्जनों गांव के लोगों ने बाबा के दरबार में मत्था टेक प्रसाद चढ़ाया और मेले में जमकर खरीदारी की। मेले में भीड़ अधिक होने के कारण पुलिस को व्यवस्था संभालने में खासी मशक्कत करनी पड़ी। देर शाम तक श्रद्धालुओं का मेले में पहुंचना जारी रहा।
श्याम बाबा की आकर्षक फूल बंगला झांकी सजाने के लिए कोलकाता से 80 किलो फूल मंगवाए गए। जिसके दर्शनों के लिए मंदिर प्रांगण में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। इससे पहले गुरुवार रात मंदिर प्रांगण में श्याम बाबा का जागरण हुआ। इसमें स्थानीय कलाकारों ने गणेश वंदना से कार्यक्रम की शुरुआत की। भोपाल की भावना पंवार ने श्याम का दरबार निराला भजन सुना कर लोगों को नाचने पर मजबूर कर दिया।
कलाकार पुरुषोत्तम बृजवासी, खुशी खुशबू, आशीष शर्मा, कुमार हितेश ने भी एक से बढ़कर एक श्याम बाबा के भजन सुना कर लोगों को रात भर बैठने के लिए मजबूर कर दिया। लोगों ने पूरी रात पंडाल में बैठकर श्याम बाबा के भजन सुनने का आनंद लिया। जागरण के दौरान हनुमानजी, श्याम बाबा, राधा कृष्ण, भगवान शंकर की आकर्षक जीवंत झांकियां सजाई गई। श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने से पंडाल भी छोटा पड़ गया।