
Dausa Road Accident: दौसा। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर धनावड़-कोलवा के समीप हुए भीषण सड़क हादसे में पुलिस ने गैर इरादतन हत्या का मामला मानते हुए ट्रेलर चालक राजेंद्र सिंह रावत पुत्र सुरेंद्र सिंह, निवासी केसरपुरा, थाना मांगलियावास (अजमेर) को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधीक्षक पीयूष दीक्षित एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शंकरलाल मीणा के निर्देशन तथा वृत्ताधिकारी लक्ष्मीकांत शर्मा के सुपरविजन में थानाधिकारी मनोहर लाल ने मामले की जांच की। पुलिस के अनुसार 30 जून की रात स्लीपर बस और ट्रेलर की टक्कर के बाद दोनों वाहनों में आग लग गई, हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई थी।
मामले में सन्नी तंवर निवासी बड़वाह, जिला खरगोन (मध्यप्रदेश) की रिपोर्ट पर जांच शुरू की गई। अनुसंधान में सामने आया कि ट्रेलर चालक इमरजेंसी लेन में वाहन चलाते हुए बांदीकुई-जयपुर लिंक रोड से अजमेर की ओर मुड़ने के लिए अचानक ब्रेक लगाकर ट्रेलर घुमा रहा था। इसी दौरान पीछे से आ रही बस उससे टकरा गई, जिससे यह भीषण हादसा हुआ। पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर आरोपी चालक को गिरफ्तार कर लिया है।
दौसा बांदीकुई दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर धनावड़-कोलवा के समीप ऋषिकेश से इंदौर (मध्यप्रदेश) जा रही हंस ट्रेवल्स की सवारियों से भरी स्लीपर बस 30 जून तड़के करीब ढाई बजे ओवरटेक करते समय एक ट्रेलर से टकरा गई थी। टक्कर के बाद बस में भीषण आग लग गई थी। हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि 22 यात्री घायल हुए थे। छह लोग जिंदा जल गए, जबकि दो घायलों ने जिला अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था। घायलों ने बताया था कि ट्रेलर से टकराने के बाद करीब दो मिनट बाद बस में आग लगी थी यदि बस का आपातकालीन गेट खुल जाता तो शायद वे बच जाते। हादसे के वक्त बस में कुल 37 यात्री सवार थे। मौके पर मिले शव पूरी तरह जल चुके थे, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल था। पुलिस ने मृतकों की पहचान के लिए डीएनए जांच करवाई। इसके बाद शव परिजनों को सौंपे गए थे।
सीसीटीवी फुटेज की जांच में स्पष्ट दिख रहा है कि स्लीपर बस ट्रेलर के पीछे चल रही थी। ट्रेलर डायवर्जन पॉइंट से थोड़ा आगे निकल गया था और उसने स्पीड कम कर टर्न लेने की कोशिश की। इसी दौरान सीधे आ रही बस ट्रेलर से टकरा गई। टक्कर के बाद दोनों वाहन हाईवे के मीडियन में उतर गए और उनमें आग लग गई थी।
इस भीषण सड़क हादसे ने एक बार फिर एक्सप्रेस-वे पर सुरक्षा इंतजामों और संकेतकों की कमी को उजागर कर दिया था। जिस स्थान पर ट्रेलर और स्लीपर बस की टक्कर में आठ लोगों की मौत हुई, वहां पर्याप्त संकेतक नहीं होने से वाहन चालक अक्सर भ्रम की स्थिति में पड़ जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे वाली जगह से कुछ ही दूरी आगे एक्सप्रेस-वे की सड़कें अलग-अलग दिशाओं में विभाजित होती है, लेकिन स्पष्ट दिशा-सूचक बोर्ड नहीं होने से चालक समय पर सही लेन का चयन नहीं कर पाते। यही असमंजस कई बार दुर्घटनाओं का कारण बनता है। दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेस-वे धनावड़ कोलवा में जयपुर से कनेक्ट होने वाले हाइवे चढ़ने के लिए जाने वाले मार्ग पर कोई संकेतक नहीं है। यह संकेतक करीब आधा किलोमीटर दूर है, जो दूर से कई चालकों को दिखाई नहीं देता।