डीएसओ मोहनलाल देव ने स्पष्ट चेतावनी दी कि निर्धारित समय सीमा के बाद भी यदि कोई अपात्र व्यक्ति योजना में बना रहता है तो उसके खिलाफ सख्त वसूली कार्रवाई की जाएगी।
दौसा। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना (एनएफएसए) से अपात्र लोगों को बाहर करने के लिए खाद्य विभाग का ‘गिव अप’ अभियान जिले में तेजी पकड़ चुका है। विभाग की सख्ती और जागरूकता प्रयासों के चलते अब तक 4,260 परिवारों के कुल 20,853 सदस्यों ने स्वेच्छा से अपने नाम योजना से हटवा लिए हैं। वहीं, नियमों के बावजूद लाभ लेने वाले 1,158 अपात्र व्यक्तियों को औपचारिक नोटिस जारी किया जा चुका है।
जिला रसद अधिकारी (डीएसओ) मोहनलाल देव ने बताया कि अभियान का उद्देश्य वास्तविक जरूरतमंदों तक सरकारी लाभ पहुंचाना है। इसके तहत ऐसे परिवारों को चिन्हित किया जा रहा है जो सरकारी कर्मचारी हैं, आयकर दाता हैं, जिनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक है, या जिनके पास निजी चारपहिया वाहन है। ऐसे सभी परिवारों को 28 फरवरी तक अंतिम अवसर दिया गया है कि वे स्वेच्छा से आवेदन कर अपना नाम योजना से हटवा लें।
डीएसओ मोहनलाल देव ने स्पष्ट चेतावनी दी कि निर्धारित समय सीमा के बाद भी यदि कोई अपात्र व्यक्ति योजना में बना रहता है तो उसके खिलाफ सख्त वसूली कार्रवाई की जाएगी। इसमें अब तक मिले राशन की बाजार दर से वसूली, जुर्माना और नियमानुसार कानूनी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।
अपात्र परिवारों की पहचान के लिए विभाग ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। प्रवर्तन अधिकारियों, खाद्य निरीक्षकों और उचित मूल्य दुकानदारों के समन्वय से घर-घर सत्यापन किया जा रहा है। इसके अलावा, परिवहन विभाग से चारपहिया वाहन मालिकों का डेटा प्राप्त कर क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जाएगा, ताकि वाहनधारक अपात्र परिवारों को चिन्हित किया जा सके।
खाद्य विभाग ने यह भी कहा है कि यह अभियान किसी को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने और पात्र परिवारों के अधिकार सुरक्षित रखने के लिए चलाया जा रहा है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जागरूकता शिविर लगाए जा रहे हैं ताकि लोग स्वेच्छा से योजना से बाहर आ सकें। अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से राशन वितरण व्यवस्था अधिक निष्पक्ष बनेगी और जरूरतमंद परिवारों को उनका पूरा हक मिल सकेगा।