गो-मुख में वर्षभर पानी आता है।
पुरुषोतम शर्मा.बसवा. बांदीकुई उपखण्ड क्षेत्र में पहाडिय़ों के बीच घिरा झाझीरामपुरा धार्मिक स्थल भी लोगों की आस्था का केन्द्र बनता जा रहा है। यहां पहाड़ों से झरने के रूप में गोमुख से अविरल जलधारा बहती है। यह पानी गोमुख कुण्ड से आगे स्थित बड़े कुण्ड से होकर बाहर वाले कुण्ड में होते हुए कमल कुण्ड में जाता है। पहाड़ी से गो-मुख में होकर आने वाला पानी ऊपर किसी को भी दिखाई नहीं देता है। इस गो-मुख में वर्षभर पानी आता है। कुण्ड में लोग स्नान करते है।
यहां श्रावण मास में जिलेभर में महिला एवं पुरुष स्नान करने आते हैं। 11 रुद्रीय शिवलिंग भी मुख्य आकर्षण का केन्द्र है। यहां रुद्राभिषेक व दुग्धाभिषेक होने से हमेशा मेला जैसा माहौल बना रहता है। यहां लोग पिकनिक भी मनाते हैं। प्रतिवर्ष मेला भी भरता है। इसमें 20 से 25 हजार श्रद्धालु शिरकत करते हंै।
क्षेत्र के लोग इस धार्मिक स्थल को पर्यटन स्थल का दर्जा दिलाने के लिए लम्बे समय से मांग करते करते आ रहे हैं। यदि इसे पर्यटन स्थल का दर्जा मिल जाए तो क्षेत्र के विकास को गति मिलने के साथ ही लोगों को भी रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। चारों ओर से हरियाली पहाड़ी से घिरी होने के कारण मुख्य आकर्षण का केन्द्र है।
झाझीरामपुरा का परिचय
महंत मनोज अवस्थी ने बताया कि झाझीरामपुरा तीर्थस्थल महाभारत काल की तपोभूमि है। अरावली की पहाड़ों में संत तपस्या किया करते थे। पांडवों ने वनवास के समय अस्त्र शस्त्रों की प्राप्ति के लिए रूद्रदेवों की उपासना बाबा भूरासिद्ध महाराज के सान्निध में उपासना शुरू की थी।
पांडवो व भूरासिद्ध महाराज की कठोर तपस्या से एकादश रूद्र प्रकट हुए। उसी दिन से रूद्रों के ऊपर अविरल गंगा जल से जलाभिषेक हो रहा है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव एंव उनके वामांग में मॉ पार्वती नंदी पर शोभायमान है। भगवान शिव के बायीं व दायीं तरफ पांच-पांच रूद्रलिंग प्रतिष्ठित है। इन सभी एकादश रूद्रों पर प्रकृति स्वयं जलाभिषेक कर रही है ।
भरता है लक्खी मेला
लोगों ने बताया की महाशिवरात्रि पर लक्खी मेला भरता है। मेले में राजगढ़, अलवर, जयपुर दौसा, दिल्ली के लोग आते हैं। इस दौरान दर्शनों करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है।