mehandipur balaji hanuman jayanti : विश्व विख्यात आस्थाधाम में गुरुवार को हनुमान जन्मोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। सिद्धपीठ के महंत डॉ. नरेशपुरी महाराज के सान्निध्य में पंडितों के मंत्रोच्चार के बीच स्वयंभू बालाजी का 1100 किलो पंचामृत से अभिषेक किया गया तथा सोने का चोला चढ़ाया गया।
Mehandipur Balaji Hanuman Jayanti : मेहंदीपुर बालाजी। विश्व विख्यात आस्थाधाम में गुरुवार को हनुमान जन्मोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। सिद्धपीठ के महंत डॉ. नरेशपुरी महाराज के सान्निध्य में पंडितों के मंत्रोच्चार के बीच स्वयंभू बालाजी का 1100 किलो पंचामृत से अभिषेक किया गया तथा सोने का चोला चढ़ाया गया। महाबली का अलौकिक श्रृंगार कर बालरूप झांकी सजाई गई।1784 किलो चूरमा, मेवा, फल व विविध व्यंजनों का भोग लगाया गया। महंत द्वारा 151 कन्याओं को वस्त्र वितरण किया गया।
सुबह सात बजे मंगला महाआरती के साथ मंदिर परिसर घंट-घड़ियालों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं पर ड्रोन और हेलीकॉप्टर से फूल वर्षा की गई। इसके बाद भक्तों ने कतारबद्ध दर्शन कर प्रसाद अर्पित किया। ट्रस्ट द्वारा पंचामृत, पकौड़ी, बूंदी दाने व छप्पनभोग का वितरण हुआ। मंदिर परिसर में 2 हाथी, 6 घोड़े, आकर्षक झांकियां, थ्रीडी लाइटिंग, भव्य द्वार व 300 मीटर लंबी सजी गैलरी आकर्षण का केंद्र रही। बड़ी स्क्रीन पर भी दर्शन कराए गए।
महंत डॉ. नरेशपुरी महाराज के सान्निध्य में हनुमान जन्मोत्सव के खास मौके पर 2 हाथी, 6 घोड़े भी मंदिर परिसर में मौजूद रहे। कारीगरों द्वारा मंदिर प्रांगण व गर्भगृह को अति भव्य स्वरूप प्रदान किया गया। मंदिर के दोनों ओर भव्य स्वागत द्वार बनाए गए। मंदिर के बाहरी आवरण पर रंग बिरंगी थ्रीडी लाइटिंग, पर्दे सहित मंदिर के मैन द्वार को महलनुमा बनाया गया, जो भक्तों को बेहद आकर्षित कर रहा है।
महंत डॉ. नरेशपुरी महाराज ने दर्शनार्थियों और देशवासियों को हनुमान जन्मोत्सव की शुभकामनाएं दी। महंत ने बताया कि बालाजी महाराज से विश्व शांति की प्रार्थना की है। उन्होंने बताया कि मेहंदीपुर बालाजी धाम में हनुमानजी साक्षात बालरूप में विराजमान हैं। बालाजी महाराज अपने भक्तों की सभी मनोकामना पूरी करते हैं।
मेहंदीपुर बालाजी का मंदिर राजस्थान के दौसा जिले में स्थित है। मेहंदीपुर बालाजी के दर्शन और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। बताया जाता है कि मेहंदीपुर धाम मुख्यत: नकारात्मक शक्ति एवं प्रेतबाधा से पीड़ित लोगों के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि नकारात्मक शक्ति से पीड़ित लोगों को यहां शीघ्र ही मुक्ति मिल जाती है।
बताया जाता है कि यहां बालाजी के सीने के बाईं ओर एक छोटा-सा छिद्र है। इसमें से जल बहता रहता है। बालाजी के दरबार में जो भी आता है, वह आरती में शामिल होकर आरती के छीटें जरूर लेता है। माना जाता है कि ऐसा करने पर रोग मुक्ति और ऊपरी चक्कर से रक्षा होती है।