
दौसा। प्रस्तावित पंचायत राज चुनावों को लेकर ग्रामीण अंचलों में सियासी हलचल तेज हो गई है। सरपंच, पंच, पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य पदों के संभावित प्रत्याशी आरक्षण की लॉटरी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। आरक्षण की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से कई दावेदार खुलकर जनसंपर्क शुरू नहीं कर पा रहे, जिससे असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
चौपालों, चाय की दुकानों और सार्वजनिक स्थलों पर चुनावी चर्चाएं तेज हो गई हैं। संभावित प्रत्याशी अपने स्तर पर संपर्क साध रहे हैं, जबकि मतदाता भी सामाजिक समीकरण और विकास कार्यों के आधार पर आकलन में जुटे हैं। अधिकांश दावेदार लॉटरी के बाद ही पूरी ताकत से मैदान में उतरने की रणनीति बना रहे हैं।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार आरक्षण लॉटरी और चुनाव कार्यक्रम के बीच कम समय मिलने की संभावना है, जिससे प्रचार गतिविधियां अचानक तेज होंगी। इस बार ओबीसी आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी। संभावना है कि माह के अंत तक लॉटरी प्रक्रिया पूरी हो जाए। इसके बाद ही सीटों का वर्गवार आरक्षण तय होगा।
निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव ईवीएम से, जबकि पंच-सरपंच के चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएंगे। इस बार न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता नहीं होने से अधिक प्रत्याशी चुनाव लड़ सकेंगे।
चुनाव जनवरी 2025 की मतदाता सूची के आधार पर होंगे। ऐसे में जिन मतदाताओं के नाम अब भी ग्रामीण सूची में दर्ज हैं, वे भागीदारी कर सकेंगे। हालांकि शहरी क्षेत्रों में नाम जुड़वाने वालों के नाम भविष्य में ग्रामीण सूची से हट सकते हैं। इधर, ग्रामीण क्षेत्रों में बैठकों और रणनीति बनाने का दौर शुरू हो गया है तथा मतदाता उम्मीदवारों की सक्रियता पर नजर बनाए हुए हैं।