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Rajasthan Crime: घर में मां की बेरहमी से हत्या के बाद दादा-दादी को भी धमकाया, हत्यारे बेटे को अब उम्रकैद

अपनी सगी मां की निर्मम हत्या करने वाले कलयुगी बेटे को लालसोट एडीजे कोर्ट ने कड़ी सजा सुनाते हुए यह स्पष्ट संदेश दिया है कि पारिवारिक रिश्तों में भी जघन्य अपराध करने वालों के प्रति कानून किसी प्रकार की नरमी नहीं बरतेगा।
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दौसा

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Anil Prajapat

Jul 17, 2026

Lalsot Mother Murder Case

फैसला सुनाने के बाद हत्यारे बेटे को कोर्ट से ले जाते पुलिसकर्मी। फोटो: पत्रिका

दौसा। अपनी सगी मां की निर्मम हत्या करने वाले कलयुगी बेटे को लालसोट एडीजे कोर्ट ने कड़ी सजा सुनाते हुए यह स्पष्ट संदेश दिया है कि पारिवारिक रिश्तों में भी जघन्य अपराध करने वालों के प्रति कानून किसी प्रकार की नरमी नहीं बरतेगा। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश गीता पाठक ने आरोपी गोविन्द शर्मा को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) और 50 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा नहीं करने पर आरोपी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

अपर लोक अभियोजक अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि 13 मार्च 2024 को दौसा जिले में रामगढ़ पचवारा थाना क्षेत्र के नापा का बास गांव में आरोपी गोविन्द शर्मा ने अपनी मां पुष्पा देवी के सिर पर लोहे की मूसली से ताबड़तोड़ वार कर उनकी हत्या कर दी थी। वारदात के समय आरोपी के पिता भगवान सहाय बैंक गए हुए थे, जबकि घर पर मौजूद वृद्ध दादा-दादी को आरोपी ने धमकाकर बाहर भगा दिया था। शाम को पिता के लौटने पर कमरे से खून बहता मिला और अंदर पत्नी का शव पड़ा था। इसके बाद उन्होंने ही रामगढ़ पचवारा थाने में एफआईआर दर्ज कराई।

दो माह में चार्जशीट, मजबूत साक्ष्यों से साबित हुआ अपराध

मामले की जांच तत्कालीन थानाधिकारी बुद्धिप्रकाश ने की और घटना के मात्र दो माह के भीतर 19 मई 2024 को अदालत में चार्जशीट पेश कर दी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 18 गवाहों, दस्तावेजी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध किए।

फांसी की मांग, कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद

16 जुलाई 2026 को अंतिम बहस के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपी को मृत्युदंड देने की मांग की थी। हालांकि, न्यायालय ने साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए आरोपी गोविन्द शर्मा को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

इधर, बेटी की मौत मामले में पिता को 10 साल की सजा

सिरोही: पढ़ाई नहीं करने पर बेटी के साथ बेरहमी से मारपीट कर उसकी मौत का कारण बने पिता को दो वर्ष पुराने मामले में न्यायालय ने 10 वर्ष के साधारण कारावास से दंडित किया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश क्रम संख्या-1, आबूरोड कुलदीप सूत्रकार ने गुरुवार को प्रकरण में फैसला सुनाते हुए आरोपी पिता फतेह मोहम्मद को मानव वध का दोषी मानते हुए सजा सुनाई। उप निदेशक अभियोजन अधिकारी राजश्री व्यास ने बताया कि 5 अप्रैल 2024 को गांधीनगर निवासी अकरम भाई ने आबूरोड शहर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

रिपोर्ट के अनुसार, 4 अप्रेल को वह अपने भाई फतेह मोहम्मद के घर पहुंचे, जहां उनकी भतीजी मोमीना बेहोशी की हालत में मिली। पूछताछ में फतेह मोहम्मद ने बताया कि पढ़ाई को लेकर कहासुनी के दौरान हाथापाई हुई थी। वहीं मृतका के भाई शाहरुख ने बताया कि पढ़ाई नहीं करने की बात पर फतेह मोहम्मद ने मोमीना के साथ थप्पड़ों, मुक्कों और लकड़ी से मारपीट की थी। गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया था।