दौसा

Success Story: ठेले पर पतासी बेचकर की पढ़ाई, राजस्थान के टिंकू सैनी ने ​हासिल की 2 सरकारी नौकरियां

Rajasthan Success Story: राजस्थान के दौसा जिले के लालसोट में पतासी का ठेले लगाने वाले टिंकू सैनी ने सरकारी शिक्षक बनने का सपना साकार किया है। इससे पहले उन्होंने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती में भी सफलता ​हालिस की थी।

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Jun 09, 2026
ma bed patashi wala
एमए बीएड पतासी वाला टिंकू सैनी। फोटो- पत्रिका

Rajasthan Success Story: राजस्थान के दौसा जिले के लालसोट में कोथून रोड पर पंचायत समिति के पास लगे एक ठेले पर लिखा रहता था ‘ एमए बीएड पतासी वाला ’। यह नाम राहगीरों का ध्यान खींचता था और लोग इसके पीछे की कहानी जानने को उत्सुक रहते थे। लेकिन आज उसी ठेले वाले युवक टिंकू सैनी ने राजस्थान शिक्षक भर्ती तृतीय श्रेणी लेवल - 2 परीक्षा में सफलता हासिल कर सरकारी शिक्षक बनने का सपना साकार कर लिया है। टिंकू सैनी के पिता का नाम बिरदीचंद सैनी है। वे केमला की ढाणी के निवासी हैं।

दिन में ठेला, रात में पढ़ाई

एमए और बीएड की पढ़ाई पूरी करने के बाद भी नौकरी नहीं मिलने पर टिंकू सैनी ने वर्ष 2022 में परिवार का सहारा बनने के लिए पानी - पतासी का ठेला शुरू किया। उन्होंने अपने ठेले का नाम ही ‘ एमए बीएड पतासी वाला ’ रख दिया। दिनभर ठेले पर मेहनत करने के बाद रात में पढ़ाई कर उन्होंने संघर्ष और आत्मविश्वास की मिसाल पेश की। धूप, थकान और तमात दिक्तों के बावजूद टिंकू सैनी ने पढ़ाई नहीं छोड़ी।

लक्ष्य के साथ कभी समझौता नहीं किया

टिंकू सैनी के कंधों पर परिवार की जिम्मेदारी थी, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य के साथ कभी समझौता नहीं किया । हर छोटी कमाई से किताबें खरदकर समय बचाकर नोट्स बनाए और लगातार मेहनत करता रहा । एक लाइब्रेरी के संचालक जेपी सैनी ने उन्हें मुफ्त कोचिंग की सुविधा दी ।

जेपी सैनी ने बताया कि टिंकू दिनभर काम करने के बाद देर रात तक पढ़ाई करते थे । उनकी मेहनत का ही परिणाम रहा कि शिक्षक बनने से पहले उन्होंने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती में भी सफलता प्राप्त की । इसके बाद उन्होंने राजस्थान शिक्षक भर्ती लेवल - 2 में प्रदेशभर में 59वीं रैंक हासिल कर शिक्षक बनने का सपना पूरा किया।

पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी टिंकू सैनी की सफलता

दौसा जिले में टिंकू सैनी की सफलता आज पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है । उनकी कहानी उन युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा है जो संसाधनों की कमी या असफलताओं से निराश हो जाते हैं और हताश होकर पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते है । टिंकू सैनी ने साबित कर दिया कि कोई भी काम बड़ा या छोटा नहीं होता और मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती ।

Published on:
09 Jun 2026 03:53 pm