Ram Mandir Ayodhya: विहिप के विभाग मंत्री परमानंद शर्मा ने बताया कि वर्ष 1990 में जिले से करीब 1150 कारसेवक अयोध्या गए थे। उत्तरप्रदेश की सीमा पर कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। जानें उन्होंने क्या बताया-
दौसा। अयोध्या में बनाए गए भव्य मंदिर में 22 जनवरी को रामलाल की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर शहरों से लेकर गांवों तक माहौल राममय हो गया है। जिले में करीब 2.65 लाख परिवारों तक अयोध्या से आए पूजित अक्षत, भगवान का चित्र तथा पत्रक वितरित किए जा रहे हैं। अब तक वितरण का करीब 85 प्रतिशत कार्य पूरा हो गया है।
सुबह से ही गली-मोहल्लों में टोलियां बनाकर महिला-पुरुष कार्यकर्ता घर-घर दस्तक दे रहे हैं। 21 जनवरी को छोटी दिवाली तथा 22 को दिवाली मनाने का आग्रह किया जा रहा है। जिले को 11 प्रखण्ड, 33 बस्ती आदि में बांटकर हजारों कार्यकर्ताओं की टोली बनाई गई है। अयोध्या से आए पूजित अक्षतों की 1 हजार थैली गांव-गांव तक पहुंचाई गई है। 21 जनवरी की शाम घर-घर में 5-5 दीपक जलाए जाएंगे।
22 जनवरी को सुबह 11 से 1 बजे तक मंदिर केन्द्रित कार्यक्रम होगा। इसमें अयोध्या में होने वाले कार्यक्रम को लाइव दिखाकर हनुमान चालीसा, सुंदरकाड़ व रामधुनि सहित अन्य धार्मिक आयोजन होंगे। शाम को दिवाली की तरह रामजी के चित्र के आगे दीप जलाए जाएंगे। महिलाएं थाली में दीपक सजाकर प्रत्येक घर में रखकर आएंगे। घरों में मिठाई व पकवान आदि बनाए जाएंगे।
6 किमी पैदल चलकर पहुंचे थे अयोध्या
विहिप के विभाग मंत्री परमानंद शर्मा ने बताया कि वर्ष 1990 में जिले से करीब 1150 कारसेवक अयोध्या गए थे। उत्तरप्रदेश की सीमा पर कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। शर्मा के अलावा राजेन्द्र जैन, कृष्णावतार गुप्ता, ओमप्रकाश बुकसेलर, पंडित रामेश्वर, कमलेश मंडावरी सहित 22 जनों का दल आखिर में गया था, जिनमें से चार लोगों को रास्ते में उतार लिया गया।
इसके बाद मथुरा से मैनपुरी तक वे 18 लोग वेषभूषा बदलकर पहुंचे। पुलिस से बचने के लिए जेब में बीड़ी-सिगरेट भी रखनी पड़ी, ताकि पुलिस कारसेवक ना समझे। इसके बाद वे 6 दिन पैदल चलकर अयोध्या पहुंचे। जिस दिन अयोध्या में गोलीबारी हुई, तब वे मोहम्मदपुरा में थे। वहां के ग्रामीणों ने उनका सहयोग किया। एक बीडीओ ने उन सबको पकडकऱ एक टै्रक्टर में बैठा दिया था, लेकिन जैसे-तैसे दल बच निकला और गोलीबारी के अगले दिन अयोध्या पहुंचा। वहां का हृदयविदारक दृश्य था। दीवारों में गोलियां लगी हुई थी। इसके बाद 1992 की कारसेवा में भी गए थे। उन्होंने बताया कि अब राम मंदिर बनने से बहुत आनंद की अनुभूति हो रही है।
किशोरावस्था में गए, देखा लाठीचार्ज और जेल
शिक्षक अभय सक्सेना ने बताया कि वे वर्ष 1990 में 16 वर्ष की आयु में घर से रामकरण जोशी विद्यालय में अध्ययन करने निकले थे। स्कूल के सामने से अयोध्या जा रहे कारसेवकों के जूलूस का हिस्सा बन गए और राम मंदिर आंदोलन से जुड़ गए। दौसा से वरिष्ठ कार्यकर्ता कैलाश गोठड़ा, गोवर्धन बढ़ेरा, कैलाश बंशीवाल आदि के नेतृत्व में ट्रेन से अयोध्या के लिए रवाना हुए। साथ में पूर्व मंत्री ललित किशोर चतुर्वेदी, रघुवीर सिंह कौशल आदि भी थे।
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उत्तर प्रदेश के पहले रेलवे स्टेशन अछनेरा में पुलिस ने कारसेवकों पर लाठीचार्ज किया और ट्रेन से उतार लिया। इससे कई कार सेवक घायल हो गए। बाद में सभी को बसों में भरकर आगरा के कॉलेज में बनाई अस्थाई जेल में रखा। उनके साथ भरतलाल आभानेरी थे और दोनों रात को दीवार कूदकर अयोध्या के लिए चल दिए। रास्ते में पुलिस ने फिर पकड़कर अस्थाई जेल कॉलेज में भेज दिया। दूसरे दिन सभी कार सेवकों को आगरा केंद्रीय कारागार में भेज दिया। 12-15 दिन जेल में रखकर दमन किया गया। अब मंदिर निर्माण का सपना साकार हो रहा है तो गर्व महसूस हो रहा है।