
देहरादून : उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के काशीपुर में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के एक समूह ने कथित तौर पर एक कश्मीरी शॉल विक्रेता पर हमला किया, लूटपाट की और राज्य छोड़ने की धमकी दी गई। इस घटना के बाद जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) ने उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। इस घटना ने पहाड़ी राज्य में मौसमी रूप से काम करने वाले कश्मीरी व्यापारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
पीड़ित की पहचान कुपवाड़ा (कश्मीर) निवासी बिलाल अहमद गनी के रूप में हुई है, जो पिछले लगभग एक दशक से उधम सिंह नगर में शॉल बेचते आ रहे हैं और पहले कभी कोई घटना नहीं हुई। एक समाचार पत्र से बातचीत में JKSA के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुएहामी ने इस घटना का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा, 'लंबे समय से शांतिपूर्वक काम करने के बावजूद बिलाल अहमद पर बेरहमी से हमला किया गया, उनकी शॉल की स्टॉक लूट ली गई, मौत की धमकी दी गई और प्रदेश को तुरंत छोड़ने का आदेश दिया गया।'
यह घटना कश्मीर से जीविका की तलाश में आए कश्मीरी समुदाय के व्यापारियों में डर का माहौल पैदा कर रही है। खुएहामी ने आगे कहा, 'ऐसे कृत्यों से न केवल पीड़ित बल्कि क्षेत्र में मौसमी काम पर निर्भर अन्य कश्मीरी व्यापारियों में भी डर का माहौल बन गया है।'
JKSA के पत्र में आरोप लगाया गया है कि यह हमला स्थानीय बजरंग दल नेता अंकुर सिंह के नेतृत्व में किया गया। एसोसिएशन ने यह भी बताया कि पीड़ित ने पहले ही प्रतापुर, गोशाला पुलिस चौकी में शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन अभी तक प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की गई है।
कश्मीरियों के संवैधानिक अधिकारों पर जोर देते हुए खुएहामी ने कहा कि ऐसी लक्षित हिंसा राष्ट्रीय एकता को कमजोर करती है। 'कश्मीरी भारत में बाहरी नहीं बल्कि समान नागरिक हैं। निर्दोष कश्मीरी व्यापारियों को निशाना बनाना और शहरों से बाहर निकालना केवल अलगाव और अविश्वास को गहरा करता है तथा भारत के सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करने वाली शत्रु शक्तियों के हाथों खेलता है।'
JKSA ने डीजीपी दीपम सेठ से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की मांग की है ताकि शिकायत को FIR के रूप में दर्ज किया जाए, निष्पक्ष जांच हो और आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए। एसोसिएशन ने बिलाल अहमद गनी तथा उत्तराखंड में अन्य कश्मीरी व्यापारियों को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने की भी मांग की है।
हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स में घटना का एक वीडियो सामने आने की बात कही गई है, जिसमें हमलावरों द्वारा पीड़ित को नारे लगाने के लिए मजबूर करने का प्रयास दिखाया गया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक FIR दर्ज नहीं हुई है।