
Supreme Court relief Mohammad Deepak:सुप्रीम कोर्ट ने देहरादून के रहने वाले और जिम मालिक मोहम्मद दीपक को एक बड़ी कानूनी राहत दी है। शीर्ष अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज FIR में आगे की किसी भी तरह की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने उत्तराखंड हाई कोर्ट के उस आदेश पर भी स्टे लगा दिया है जिसमें दीपक को घटना से जुड़े वीडियो या संदेश सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से रोका गया था। बता दें कि 20 मार्च को उत्तराखंड हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई हुई थी लेकिन हाईकोर्ट ने उन्हें राहत नहीं दी थी।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। मोहम्मद दीपक की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने FIR रद्द करने से इनकार करने वाले हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी। सिंघवी ने दलील दी कि विवाद उस मुस्लिम दुकानदार के खिलाफ था और दीपक सिर्फ एक 'गुड समैरिटन' (मददगार) के तौर पर वहां गए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी जरूरतमंद की मदद करने वाले व्यक्ति को ऐसी आपराधिक शिकायत का सामना क्यों करना पड़ रहा है?
सिंघवी ने कोर्ट को बताया कि घटना की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग मौजूद है। उन्होंने हाई कोर्ट के आदेश को असामान्य बताते हुए कहा कि दंगा जैसे कुछ आरोपों को हटा दिया गया लेकिन बाकी आरोपों के बने रहने के पीछे पर्याप्त कारण नहीं बताए गए। उन्होंने यह भी कहा कि दीपक पर लगे सभी आरोपों में अधिकतम सजा 7 साल से कम है इसलिए गिरफ्तारी और जांच के दौरान सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन होना चाहिए।
इस मामले में एक बड़ा मुद्दा हाई कोर्ट का वह निर्देश भी था जिसमें मोहम्मद दीपक को जांच पूरी होने तक सोशल मीडिया पर कुछ भी पोस्ट करने से रोका गया था। सिंघवी ने इसे 'ब्लैंकेट गैग ऑर्डर' करार दिया। उन्होंने कहा कि जांच का सामना कर रहे किसी व्यक्ति पर इस तरह की व्यापक रोक लगाना बिल्कुल भी उचित नहीं है। सिंघवी की इन सभी दलीलों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया और अगली सुनवाई तक FIR में कार्रवाई और हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है।
यह पूरा मामला कोटद्वार में एक दुकान के नाम को लेकर हुए विवाद से जुड़ा है। दरअसल इसी साल 26 जनवरी को कुछ बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने एक 70 वर्षीय मुस्लिम दुकानदार द्वारा अपनी दुकान के नाम में 'बाबा' शब्द इस्तेमाल करने पर कड़ी आपत्ति जताई थी। मोहम्मद दीपक का आरोप है कि वह उस परेशान दुकानदार की मदद करने के लिए मौके पर पहुंचे थे। इसी दौरान भीड़ ने उनसे उनकी पहचान पूछी, जिसपर उनका बजरंग दल के कुछ सदस्यों से टकराव हो गया। इस पर उन्होंने खुद को मोहम्मद दीपक बताया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और उल्टा उनके खिलाफ ही आपराधिक मामला दर्ज कर लिया गया।
मोहम्मद दीपक और उनके सहयोगियों पर दुर्व्यवहार करने, मोबाइल छीनने और आपराधिक धमकी देने के गंभीर आरोप लगे थे। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए दीपक समेत कुल 23 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। हालांकि सरकार ने हाईकोर्ट में यह स्पष्ट किया था कि घटना के वक्त दीपक भीड़ को शांत कराने के लिए वहां गए थे लेकिन इसी बीच धक्कामुक्की हो गई। आपको बता दें कि इस मामले में घटना से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ पहले ही 5 अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं।