मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Chief Minister Pushkar Singh Dhami) के नेतृत्व वाली उत्तराखंड सरकार गौवंश संरक्षण (Cow Protection) के लिए 'नंदी विकास योजना' योजना चला रही है। इस योजना के तहत नंदी पालने पर 12 हजार रुपए दिए जाएंगे।
Nandi Vikas Yojana: उत्तराखंड सरकार आम जन के लिए 'नंदी विकास योजना' योजना चला रही है। इसके तहत नंदियों का पालन-पोषण करने वालों को सरकार की तरफ से 12 हजार रुपए दिए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य 'नंदी विकास योजना' के तहत गौवंश संरक्षण (Cow Protection) के साथ स्वरोजगार को बढ़ावा देना (Promoting Self-employment) है।
उत्तराखंड गौ सेवा आयोग (Uttarakhand Gau Seva Aayog) के अध्यक्ष डॉ. पंडित राजेंद्र अणथ्वाल ने चंपावत दौरे के दौरान 'नंदी विकास योजना' के बारे में विस्तार से जानकारी दी। राजेंद्र अणथ्वाल ने कहा कि सरकार निराश्रित नंदियों के संरक्षण और ग्रामीण स्तर पर रोजगार सृजन के लिए यह महत्वपूर्ण योजना चला रही है। इस योजना के तहत 5 नंदियों का पालन-पोषण करने वाले व्यक्ति को सरकार द्वारा 12 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।
गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि 'नंदी विकास योजना' केवल गौवंश संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना भी है। इस योजना से सड़कों पर घूम रहे निराश्रित नंदियों को सुरक्षित आश्रय और उचित देखभाल मिल सकेगी। सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक लोग गौसेवा से जुड़ें और इसे एक रोजगार के रूप में अपनाएं।
डॉ. पंडित राजेंद्र अणथ्वाल ने बताया कि प्रदेश में निराश्रित गौवंश की समस्या लगातार बढ़ रही है। नंदी विकास योजना के माध्यम से जन भागीदारी को बढ़ावा देकर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। योजना के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को आर्थिक सहयोग मिलेगा, जिससे स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और पशुपालन से जुड़े परिवारों की आय में वृद्धि होगी।
उत्तराखंड गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष डॉ. पंडित राजेंद्र अणथ्वाल ने कहा कि गौसंरक्षण भारतीय संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकार इस दिशा में लगातार नई योजनाएं लागू कर रही है। राजेंद्र अणथ्वाल ने लोगों से अपील की है कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं और गौसेवा को सामाजिक तथा आर्थिक रूप से उपयोगी बनाएं।
राजेंद्र अणथ्वाल ने कहा कि यह योजना न केवल गौवंश की रक्षा करेगी, बल्कि ग्रामीण युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही आय का स्रोत भी उपलब्ध कराएगी। इस पहल से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक समृद्धि भी सुनिश्चित होगी। डॉ. अणथ्वाल ने चंपावत जिले में योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए स्थानीय प्रशासन और पशुपालकों से सहयोग की अपील की।