धमतरी

Dhamtari News: गंगरेल बांध में मिली 37 साल पुरानी तीर्थंकर नेमिनाथ की दुर्लभ प्रतिमा,गायब आभूषणों ने खड़े किए कई सवाल

Dhamtari News: गंगरेल बांध में 37 साल पुरानी भगवान नेमिनाथ की दुर्लभ संगमरमर प्रतिमा मिली है। प्रतिमा पर ‘शंकर नगर रायपुर’ अंकित है, जबकि आभूषण गायब होने से चोरी का रहस्य गहरा गया है।
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Aug 13, 2026
Dhamtari News
गंगरेल बांध में मिली 37 साल पुरानी तीर्थंकर नेमिनाथ की दुर्लभ प्रतिमा (Photo Patrika)

Dhamtari-Gangrel news: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के प्रसिद्ध गंगरेल बांध में जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ की करीब 37 साल पुरानी दुर्लभ सफेद संगमरमर की प्रतिमा मिलने से जैन समाज में हलचल तेज हो गई है। करीब 11 इंच ऊंची इस प्रतिमा को 12 अगस्त की देर रात ससम्मान धमतरी के श्री पार्श्वनाथ जिनालय में सुरक्षित स्थापित कराया गया। प्रतिमा के मिलने के साथ ही इससे जुड़ा रहस्य भी गहरा गया है। प्रतिमा पर मौजूद बहुमूल्य आभूषण गायब हैं, जिसके कारण जैन समाज में आशंका जताई जा रही है कि संभवतः किसी जिनालय से प्रतिमा चोरी करने के बाद उसकी पहचान छिपाने के उद्देश्य से उसे गंगरेल बांध के जलस्तर वाले क्षेत्र में फेंक दिया गया होगा। हालांकि, प्रतिमा चोरी की है या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

प्रतिमा पर दर्ज है 2046 विक्रम संवत का उल्लेख

मिली हुई संगमरमर की प्रतिमा पर विक्रम संवत 2046 और 'शंकर नगर रायपुर' अंकित है। इसी आधार पर प्रतिमा को करीब 37 वर्ष पुरानी माना जा रहा है। प्रतिमा पर पूज्य जिन उदय सागर जी महाराज और उनके शिष्य महोदय सागर जी महाराज के नाम भी उत्कीर्ण हैं। इन महत्वपूर्ण निशानों ने प्रतिमा के मूल स्थान तक पहुंचने की उम्मीद बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि दोनों संतों का देहावसान हो चुका है। ऐसे में उनके संघों और उनसे जुड़े पुराने रिकॉर्ड के माध्यम से प्रतिमा के निर्माण, स्थापना और मूल जिनालय से संबंधित जानकारी जुटाने का प्रयास किया जा रहा है।

​बोटिंग हाउस से जिनालय तक का सफर

​गंगरेल घूमने पहुंचे दुर्ग दिगंबर जैन समाज के पर्यटकों ने बोटिंग टिकट घर में इस प्रतिमा को देखा। बोटिंग कर्मचारियों को यह बांध के जलस्तर क्षेत्र में मिली थी। दुर्ग समाज की सूचना पर श्री जैन श्वेतांबर मूर्ति पूजक संघ धमतरी के अध्यक्ष विजय गोलछा की टीम ने गंगरेल पहुंचकर प्रतिमा को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया।

चोरी की आशंका

समाज मे चर्चा है कि ​उक्त प्रतिमा रायपुर के किसी जिनालय से चुराई गई होगी। बहुमूल्य आभूषण गायब होने से चोरी की आशंका जताई जा रही है।​विजय गोलछा ने बताया कि देशभर के जैन संघों को तस्वीरें भेज दी गई हैं और पुलिस को भी आधिकारिक सूचना दी जा रही है, ताकि इस पूरे रहस्य का पर्दाफाश हो सके।

37 साल पुरानी प्रतिमा मिलने से कई सवाल

गंगरेल बांध में इस दुर्लभ प्रतिमा के मिलने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। यदि प्रतिमा वास्तव में किसी जिनालय से चोरी हुई थी, तो वह इतने वर्षों तक कहां रही? उसे बांध में किसने और कब फेंका? उसके आभूषण कहां गए? और क्या उस समय प्रतिमा चोरी होने की कोई रिपोर्ट दर्ज हुई थी? इन सभी सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।

Updated on:
13 Aug 2026 07:37 pm
Published on:
13 Aug 2026 07:33 pm