महिला कमांडो और स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं का स्पष्ट कहना है कि हम ऐसे प्रत्याशी को अपना वोट करेंगे, जो शराबबंदी के पक्ष में हो।
धमतरी. छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में तीन लाख से ज्यादा महिला मतदाता है। यहां सरकारी नियंत्रण में बिक रही शराब को लेकर उनमें काफी रोष व्याप्त है। महिला कमांडो और स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं का स्पष्ट कहना है कि हम ऐसे प्रत्याशी को अपना वोट करेंगे, जो शराबबंदी के पक्ष में हो। राजनैतिक प्रेक्षकों का कहना है कि जिले में शराब का मुद्दा यहां की राजनैतिक फिजा को बदल सकता है। इसमें महिलाओं की अहम भूमिका भूमिका होगी।
छत्तीसगढ़ शासन अब प्रदेश के सभी शराब दुकानों को अपने अंडर में चला रही है। इसके तहत धमतरी जिले में भी 19 देशी और 7 विदेशी शराब दुकानों का संचालन किया जा रहा है, लेकिन जब से शराब दुकानों का संचालन सरकारी नियंत्रण में हुआ है, तब से शराब की बिक्री दोगुनी हो गई है।
उल्लेखनीय है कि जिले में शांति व्यवस्था को कायम रखने और अवैध शराब की बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए महिला कमांडो का भी गठन किया गया है। बताया गया है कि जिले में करीब 7 हजार से अधिक महिला कमांडो कार्यरत है, जो शाम बजे ही हाथ डंडा और सिटी लेकर शराबबंदी के लिए निकल पड़ती है। महिला कमांडो रेवती बाई, देवंतीन साहू, कौशिल्या निर्मलकर का कहना है कि शराब समाज के लिए घातक साबित हो रही है। एक ओर शासन शराबबंदी की बात करती है, तो दूसरी ओर इसे अपने हाथ में लेकर संचालित कर रही है। इसी का नतीजा है कि आज समाज के 40 फीसदी लोग शराब के आदी हो गए हैं।
महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ी किरण सोनकर, उर्वशी पटेल, माधुरी, निर्मला देवांगन, कामता बाई का कहना है कि शराब से आज कई घर बर्बाद हो चुके हैं। बच्चों से लेकर बूढ़े तक इसकी गिरफ्त में है। सरकार से कई बार शराबबंदी की मांग की जा चुकी है। अब समय आ गया है कि शराब के मुद्दे पर महिलाओं को जागरूक होकर मतदान करना चाहिए।
गौरतलब है कि जिले के धमतरी, कुरूद और सिहावा विधानसभा क्षेत्र में 20 नवंबर को चुनाव होना है। इस बार महिला मतदाताओं की संख्या 3 लाख से ज्यादा है। ऐसे में पार्टी विशेष द्वारा महिलाओं को साधने का प्रयास किया जा रहा है। बताया गया है कि जिले में करीब 7 सौ से ज्यादा महिला समूह और 7 हजार से ज्यादा महिला कमांडो हैं। ऐसे मेंं उनकी नाराजगी से बड़ा फेर बदल हो सकता है।