
Dhamtari Nagdev Temple: धर्मनगरी धमतरी की प्राचीन विरासतों में हटकेशर वार्ड स्थित नागदेव मंदिर की अपनी अलग पहचान है। करीब ढाई सौ साल से अधिक पुराने इस मंदिर को लेकर स्थानीय लोगों में गहरी आस्था है। नागपंचमी के अवसर पर १७ अगस्त को यहां सुबह से भक्तों की भीड़ जुटेगी। श्रद्धालु नागदेव की चतुर्भुजी प्रतिमा का दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना करेंगे।
मंदिर में अभिषेक, श्रृंगार और महाआरती का आयोजन विधि-विधान से किया जाएगा वार्ड के बुजुर्गों के अनुसार जिस स्थान पर आज मंदिर है, वहां कभी घना जंगल हुआ करता था। मान्यता है कि नागदेव की प्रतिमा स्वयंभू है। उस समय क्षेत्र में बड़ी संख्या में सांपों का विचरण होता था, इसलिए लोग वहां जाने से भी कतराते थे। बाद में कुछ बुजुर्गों ने साहस जुटाकर वहां पहुंचकर प्रतिमा की पूजा शुरू की। धीरे-धीरे नागदेव के प्रति लोगों की आस्था बढ़ती गई और जनसहयोग से खुले में विराजित प्रतिमा को सुरक्षित करने मंदिर का निर्माण कराया गया।
मंदिर परिसर में मौजूद एक बांबी को लेकर भी लोगों की गहरी आस्था है। वार्डवासियों के अनुसार इसमें नाग का एक जोड़ा रहता है, जो समय-समय पर बाहर दिखाई देता है। नागपंचमी के दिन नाग-नागिन के जोड़े के दर्शन होने की मान्यता भी यहां प्रचलित है। बुजुर्ग बताते हैं कि पहले मंदिर परिसर बरगद और पीपल के पेड़ों से घिरा रहता था और यहां अक्सर सांप दिखाई देते थे।
पुराविदों और जानकारों के अनुसार मंदिर में स्थापित नागदेव की प्रतिमा चतुर्भुजी है। प्रतिमा के बाईं ओर सर्पाकार आकृति बनी हुई है। इसी स्थान पर काले पत्थर की दो अन्य मूर्तियां भी स्थापित हैं, जिन्हें पद्मासन की योग मुद्रा में माना जाता है। वार्ड के लोगों की मान्यता है कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत नागदेव के दर्शन और पूजन के बाद करना मंगलकारी होता है।
विजय देवांगन, दिलीप देवांगन, संतोष देवांगन सहित वार्डवासियों ने बताया कि नागदेव मंदिर से क्षेत्र के लगभग हर परिवार की आस्था जुड़ी है। लोग शुभ कार्य से पहले यहां पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं। मंदिर के प्राचीन स्वरूप और धार्मिक महत्व को देखते हुए करीब 2 करोड़ रुपए की लागत से जीर्णोद्धार कार्य शुरू किया गया है। नागपंचमी को लेकर मंदिर में विशेष तैयारियां की गई हैं।