
ग्राम पंचायतों में रोजाना बिना किसी जांच-पड़ताल के लोगों के घरों में पानी की सप्लाई की जा रही है। दो साल पहले पीएचई द्वारा पानी की जांच के लिए दी गई किट की वेलीडीटी भी समाप्त हो चुकी। अधिकारियों द्वारा नया किट देने में उदासीनता बरती जा रही है। प्रदूषित पानी के सेवन से लोगों की सेहत पर खतरा मंडराने लगा है।
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धमतरी. जिले में 355 ग्राम पंचायत हैं, जहां पेयजल की शुद्धता को लेकर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। 9500 हैंडपंप और 155 नलजल योजना के तहत लोगों के घरों तक जो पानी सप्लाई की जा रही है, उसकी जांच की चिंता पीएचई को है और न ही पंचायत प्रतिनिधियों को। शुद्ध पेयजल के नाम पर लोगों को बीमारी परोसी जा रही है। पीएचई ने दो साल पहले पानी की जांच के लिए किट बांटकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली है। अधिकारी किट का उपयोग हो रहा है कि नहीं, इसकी भी मानिटरिंग नहीं कर रहे हैं। पीएचई के सूत्रों की माने तो आज 2 हजार की कीमत की किट ग्राम पंचायतों के एक कोने में धूल खाती पड़ी है। उपकरण भी टूट-फूट गए हैं।
ग्राम लोहरसी, मुजगहन, पोटियाडीह समेत अन्य गांवों के ग्रामीणों का कहना है कि पानी की शुद्धता की कोई गारंटी नहीं है। बिना जांच के ही इसकी सप्लाई की जा रही है। नियमित रूप से आयरन, फ्लोराइड की अधिक मात्रा वाले पानी के सेवन करने से गंभीर बीमारियां फैल सकती है, लेकिन इसकी चिंता अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों को नहीं है।
ई पीएचई बीएन भोयर ने कहा कि ग्राम पंचायतों को पानी की जांच के लिए किट उपलब्ध कराया गया है। पीएचई के कर्मचारी भी समय-समय पर पानी की जांच करते हैं।