धमतरी

Women’s Day 2026: बांस की टोकरी बुनकर कमाए पैसों से 10 हजार पुस्तकें, टीवी और कंप्यूटर की दान, गांव में कॉलेज खुलवाने का सपना

Women's Day 2026: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के खम्मन बाई का सपना है कि गांव में कॉलेज खुले, इसके लिए कुछ मदद हो जाए इस इराद से बूढ़ी दादी जी-जान से मेहनत कर रही है..
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Updated: 8 Mar 2026, 1:52 PM IST
Women's day 2026
खम्मन बाई ने कमाई के पैसे स्कूल में किए दान ( Photo - Patrika )

Women's Day 2026: भूपेंद्र पटवा. दान के लिए धन नहीं मन चाहिए। कुछ ऐसी ही सोच रखने वाली धमतरी के ग्राम उत्तर सिंगपुर निवासी खम्मन बाई कमार अपने गांव के हाईस्कूल को अपने बुढ़ापे की कमाई अर्पित कर रही हैं। कमार जनजाति की खम्मन बाई कभी स्कूल नहीं गईं। 9 साल की उम्र में शादी हो गई। 16 साल पहले पति की भी बीमारी से मौत हो गई। दो बेटा, एक बेटी और नाती के साथ सिंगपुर के कमार बस्ती में रहती हैं।

Women's Day 2026: समय-समय पर करती है दान

खम्मन बाई गांव के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिन्दी विद्यालय का काया पलट करना चाहती है। (Women's day ) बच्चों को स्कूल में किसी भी चीज की कमी न हो, इसलिए समय-समय पर स्कूल को जरूरी सामान दान करते रहती है। पूर्व में पानी के लिए ड्रम, बर्तन, लाइब्रेरी को लगभग 10 हजार की पुस्तकें, स्मार्ट टीवी दे चुकी हैं। हाल ही में एक नया कम्प्यूटर सेट भी दान की है। खम्मन बाई के पास न तो कोई प्रापर्टी है और न ही उसकी कोई स्थाई इनकम के सोर्स हैं। बांस की टोकरी, पत्तल बनाकर अपना जीवन चलाती है।

खम्मन बाई का सपना, गांव में खुले कालेज

इसी से कुछ पैसे बचाकर स्कूल को समय-समय पर जरूरी सामान देते रहती है। खम्मन बाई का सपना है कि गांव में एक कालेज खुले, क्योंकि सिंगपुर से 30 किमी दूर नगरी में और सिंगपुर से ही 30 किमी दूर मगरलोड में कालेज है। 12वीं पास करने के बाद लंबी दूरी के कारण अनेक बच्चों की पढ़ाई छूट जा रही है।

कुछ विशेष चीज करेगी दान

पत्रिका से चर्चा में खम्मन बाई ने कहा कि वह दो साल बाद स्कूल को कुछ विशेष चीज दान करेगी, लेकिन इसका खुलासा वह अभी नहीं करना चाहती। खुलासे को लेकर जब उनसे आग्रह किया गया तो मुस्कुराते हुए बोली कि यदि मैं मर गई तो इस विशेष दान के सपने को कौन पूरा करेगा। खम्मन बाई के इस सहयोग की प्राचार्य डॉ वीपी चंद्रा, सिंगपुर के लोगों सहित कलेक्टर भी प्रशंसा कर रहे हैं।

बेटे- बेटी को नहीं स्कूल को दूंगी कमाई : खम्मन बाई

पत्रिका टीम खम्मन बाई के घर पहुंची तो वह अपने खपरैल मकान में टोकरी बुन रही थी। स्कूल के प्रति उनके समर्पण भाव को लेकर सवाल पूछे तो उन्होंने कहा कि जिस तरह एक पौधे को खाद देने पर पास के पौधों को भी खाद मिल जाता है। इसी उद्देश्य को लेकर वह भी गांव के स्कूल को स्मार्ट स्कूल बनाने के लिए सहयोग कर रही है, ताकि लोग भी जागे और अपने गांव के स्कूल को आकर्षक बनाने में सहयोग करें। मैं अपने बच्चों को भी अपने कमाई से कुछ नहीं दूंगी, लेकिन गांव के स्कूल को संवारने में कोई कसर नहीं छोडूंगी।

कॉलेज प्रयास कर रहे हैं

कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि खम्मन बाई महिला सशक्तिकरण का अनोखा उदाहरण है। खुद पढ़ी-लिखी नहीं हैं। स्कूल को टीवी, कम्प्यूटर, पुस्तक आदि दान कर रही हैं। खम्मन बाई कमार जनजाति की है, जिसे पिछड़ी जनजातियों में से माना जाता है। फिर भी शिक्षा के क्षेत्र में उनका यह योगदान सराहनीय है। उनका प्रेरक कार्य सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं पूरे देश के लिए प्रेरणास्पद है। सिंगपुर में उच्च शिक्षा की व्यवस्था नहीं है। यहां आईटीआई या कालेज खोलने के लिए प्रयास कर रहे हैं।

Updated on:
8 Mar 2026, 1:52 PM IST
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