
Dhar News : 17 वर्षीय रागिनी पासी की मौत ने शनिवार को मध्य प्रदेश के धार जिले के पीथमपुर में जनाक्रोश की ऐसी चिंगारी भड़काई कि, एक वाहन कंपनी की सात स्टाफ बसें तीन घंटे तक बंधक बनी रहीं। परिजन, समाजजनों और स्थानीय रहवासियों का गुस्सा सिर्फ एक हादसे पर नहीं था, बल्कि उस व्यवस्था पर था जो अक्सर किसी की जान जाने के बाद ही जागती है। प्रदर्शनकारियों का आरोप रहा कि, सूचना देने के बावजूद प्रशासन करीब दो घंटे तक मौके पर नहीं पहुंचा, जिससे लोगों का आक्रोश और बढ़ गया।
शनिवार सुबह जैसे ही कंपनी की स्टाफ बसें उत्कर्ष पैराडाइज कॉलोनी में कर्मचारियों को लेने पहुंचीं, पहले से मौजूद लोगों ने उन्हें रोक लिया। प्रदर्शनकारियों ने कर्मचारियों से कहा कि उनका विरोध कंपनी के कर्मचारियों से नहीं, बल्कि लापरवाही से है। कर्मचारी दूसरे साधनों से जा सकते हैं, लेकिन जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होगा, बसें नहीं चलेंगी।
करीब सात स्टाफ बसें मौके पर खड़ी रहीं और प्रदर्शन लगातार चलता रहा। कुछ समय के लिए सडक़ जाम की स्थिति भी बनी, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक जुट गए। करनी सेना के जिला अध्यक्ष शिवपाल सिंह गौड़ और भीम सेना के प्रमुख डॉ. हेमंत हीरोले भी प्रदर्शन में पहुंचे और पीडि़त परिवार को न्याय दिलाने की मांग का समर्थन किया।
करीब दो घंटे बाद तहसीलदार सत्येंद्र गुर्जर, पुलिस अधिकारी और प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। कंपनी प्रबंधन के प्रतिनिधियों को बुलाकर प्रशासन की मौजूदगी में लंबी वार्ता हुई। बातचीत के बाद कंपनी ने मृतका की बड़ी बहन को स्थायी नौकरी देने, घायल बहन नंदनी के इलाज का पूरा खर्च उठाने और परिवार को आर्थिक सहायता देने पर सहमति जताई। प्रशासन ने भी राऊ-पीथमपुर बायपास पर दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए तत्काल स्पीड ब्रेकर बनाने के निर्देश दिए। लिखित आश्वासन मिलने के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ और बसों का संचालन दोबारा शुरू कराया गया।
20 जुलाई को रागिनी पासी और उसकी बड़ी बहन नंदनी पासी कोचिंग से लौटते समय सब्जी खरीदने गई थीं। उत्कर्ष पैराडाइज के सामने तेज रफ्तार स्टाफ बस ने दोनों बहनों को टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल दोनों को इंदौर रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान रागिनी ने दम तोड़ दिया, जबकि नंदनी अब भी उपचाराधीन है।
घायल नंदनी की आंखों में बहन को खोने का दर्द साफ झलकता है। उसने भावुक होकर कहा, मेरी बहन तो वापस नहीं आएगी, लेकिन किसी और परिवार के साथ ऐसा हादसा नहीं होना चाहिए। प्रशासन और कंपनी ऐसी व्यवस्था करें कि फिर किसी की जान सडक़ पर न जाए।
प्रदर्शन के दौरान रागिनी की मां अपनी बेटी को याद कर बार-बार बेहोश हो गईं। परिजनों और महिलाओं ने उन्हें संभाला। वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं। लोगों की मांग सिर्फ मुआवजे तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे दोषियों पर सख्त कार्रवाई और स्थायी सडक़ सुरक्षा व्यवस्था चाहते थे।