Dhar Bhojshala news- हम हर मंगलवार को पूजा करते थे, लेकिन दिग्विजय सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस की राज्य सरकार ने हम पर पाबंदियां लगा दीं और हमें साल में सिर्फ एक बार बसंत पंचमी के दिन ही पूजा की अनुमति दी थी...।
Dhar Bhojshala news-हाईकोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला परिसर को मंदिर बताने वाले हाईकोर्ट के फैसले के बाद धार के भोज उत्सव समिति के सदस्य ने शनिवार को कहा कि दिग्विजय सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस की राज्य सरकार में हिन्दू पूजा-अर्चना पर पाबंदियां लगाई गई थीं और साल में एक बार ही पूजा की अनुमति दी थी। जबकि मुसलमानों को नमाज अदा करने का अधिकार दिया था। हिन्दुओं का ठीक वैसा ही अत्याचार किया गया, जैसा ममता सरकार में हुआ।
यह बात शनिवार को भोज उत्सव समिति के सदस्य अशोक कुमार जैन ने मीडिया से कही। उन्होंने कोर्ट के उस फैसले का स्वागत किया जिसमें 'भोजशाला-कमाल मौला परिसर' को एक मंदिर घोषित किया गया। जैन ने कहा कि उनकी पुरानी लड़ाई आखिरकार रंग लाई है। अब हिन्दू समुदाय से आगे आकर पूजा करने का भी आग्रह जैन ने किया। शनिवार सुबह से ही बड़ी संख्या में हिन्दू समाज के लोग भोजशाला पहुंचे और उन्होंने उस स्थान की पूजा-अर्चना की, जिस स्थान पर सरस्वती की मूर्ति रखी जाएगी। हालांकि उनका तेल चित्र लेकर पहुंचे कुछ लोगों को यह अनुमति नहीं दी गई, उन्हें कोर्ट के फैसले की कापी देखने के बाद ही अनुमति देने को कहा गया।
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के कार्यकाल के दौरान हिन्दू पूजा-अर्चना पर पाबंदियां लगाई गई थीं। हम हर मंगलवार को पूजा करते थे, लेकिन दिग्विजय सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस की राज्य सरकार ने हम पर पाबंदियां लगा दीं और हमें साल में सिर्फ एक बार बसंत पंचमी के दिन ही पूजा की अनुमति दी थी, जबकि मुसलमानों को नमाज अदा करने का अधिकार दिया गया था।
जैन ने कहा कि हमने कई विरोध प्रदर्शन किए और सत्याग्रह किया। इस दौरान हमारे तीन कार्यकर्ताओं की जान भी चली गई। यहां हिन्दुओं का ठीक वैसा ही अत्याचार किया गया, जैसे ममता सरकार के अधीन किए गए थे। कार्यकर्ताओं ने हार नहीं मानी और आखिरकार सरकार को भी झुकना पड़ा। 8 अप्रैल 2003 को हिन्दुओं को हर मंगलवार पूजा करने का अधिकार दे दिया गया। जैन ने कहा कि यह फैसला सबूतों और ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित है। यह खुशी की बात है कि फैसला रिपोर्ट के आधार पर सुनाया गया और इस जगह को देवी सरस्वती का मंदिर घोषित किया गया।
जैन ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि देवी सरस्वती की वह प्रतिमा जो फिलहाल लंदन के एक म्यूजियम में रखी है, उसे वापस भारत लाया जाएगा। हम उस प्रतिमा के लंदन से वापस लाने का इंतजार कर रहे हैं, जिसके लिए कोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकारों को निर्देश दिए हैं।