
Dhar Four friends funeral: घर से निकलते समय माता-पिता ने खुशी-खुशी विदा किया था। मन में बस यही इंतजार था कि दर्शन करके लौटेंगे तो बेटे फिर घर की रौनक बनेंगे। रविवार को फोन पर बात हुई, तो भरोसा भी दिलाया था कि रात एक-दो बजे तक घर पहुंच जाएंगे, लेकिन घर पहुंचने से पहले ही रास्ते में मौत ने घेर लिया। जिस रात परिवार अपने बेटों के लौटने का इंतजार कर रहे थे, उसी रात चार घरों की खुशियां हमेशा के लिए उजड़ गई। सोमवार को जब चारों दोस्तों के शव एंबुलेंस से सागौर पहुंचे तो इंतजार कर परिजनों की उम्मीदें विलाप में बदल गई। किसी ने अपना इकलौता बेटा खोया, तो किसी ने अपना भाई। चार दोस्तों की एक साथ अर्थियां उठी, तो पूरे क्षेत्र की आंखें नम हो गई।
महू नीमच फोरलेन पर धार जिले के सादलपुर के समीप हुए भीषण कार हादसे (Sadalpur car accident) ने चार परिवारों को ऐसा जख्म दिया, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा। सागौर क्षेत्र के माधौपुरा और सुहागपुरा के पांच दोस्त शनिवार को सांवरिया सेठ के दर्शन के लिए निकले थे। स्कूल के दिनों से साथ रहे इन दोस्तों ने इसी साल 12वीं की पढ़ाई पूरी कर कॉलेज में प्रवेश लिया था। साथ घूमने, साथ पढ़ने और साथ सपने देखने वाले दोस्तों को क्या पता था कि यह सफर जिंदगी का सबसे दर्दनाक सफर बन जाएगा। रविवार को मंदिर में दर्शन करने के बाद उन्होंने परिजनों से फोन पर बात भी की थी, लेकिन इसके बाद घर लौटने की राह में हादसा हो गया। पांच में से चार दोस्त हमेशा के लिए बिछड़ गए।
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हादसे में जान गंवाने वाले चेतन चौधरी (20) और आदित्य तिवारी (19) अपने परिवारों के इकलौते बेटे थे। चेतन की एक छोटी बहन है। पिता जीवन खेती-बाड़ी करते हैं। बेटे के दुनिया छोड़ देने के बाद माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। जिस भाई की कलाई पर बहन हर साल राखी बांधती थी, अब उसकी कलाई हमेशा के लिए सूनी हो गई। आदित्य भी परिवार का इकलौता और लाड़ला बेटा था। उसके पिता एक कंपनी में काम करते हैं। जिस बेटे से परिवार को भविष्य की उम्मीदें थीं, उसके अचानक चले जाने से घर में मातम पसरा है।
अंकुश उर्फ भीम के परिवार में चार दिन पहले ही बड़े भाई के घर बेटे का जन्म हुआ था। घर में सूतक होने के कारण पिता ने उसे सांवरिया सेठ के दर्शन के लिए जाने से मना किया था, लेकिन वह दोस्तों के साथ जाने की जिद पर अड़ा रहा। पहले भी सभी दोस्त साथ में सांवरिया सेठ के दर्शन कर चुके थे। इस बार भी वे उसी उत्साह के साथ निकले थे, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि साथ बिताए ये पल उनकी जिंदगी की आखिरी याद बन जाएंगे।
मृतक अभिषेक के रिश्तेदारों के मुताबिक, रविवार शाम करीब आठ बजे परिवार की आखिरी बार बात हुई थी। रात करीब दो बजे सागौर थाने से चौकीदार को सूचना मिली, जिसके बाद घरों तक हादसे की खबर पहुंची। हादसे की गंभीरता के कारण परिजनों को अपने बेटों के चेहरे आखिरी बार देखने का मौका भी नहीं मिला। सोमवार को तीन अर्थियां सागौर से और चौथी सुहागपुरा से निकली। सागौर मुक्तिधाम में चारों दोस्तों का अंतिम संस्कार किया गया।
सांवरिया सेठ के दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालुओं के साथ दो दिन में हादसे की यह दूसरी घटना है। शनिवार को कानवन के समीप कार पेड़ से टकरा गई थी, जिसमें इंदौर के दो युवकों की जान चली गई थी। इसके बाद रविवार रात सादलपुर के समीप हुए हादसे में चार युवकों की जान चली गई। लगातार हुए इन हादसों ने परिवारों को गहरे दुख में डुबो दिया है।