
Indore news: एमपी के धार जिला जेल में बंदी की कथित पिटाई के बाद मौत के मामले में हाईकोर्ट ने जेल अधीक्षक और मेडिकल बोर्ड के डॉक्टर्स को राहत देने से इनकार कर दिया है। जस्टिस जय कुमार पिल्लई की कोर्ट ने कैदी की मौत की मजिस्ट्रियल जांच को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करते हुए कहा कि हिरासत में मौत के मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट की जांच का दायरा
केवल मौत के चिकित्सकीय कारण का पता लगाने तक सीमित नहीं है। मजिस्ट्रेट यह भी बता सकता है कि हिरासत में मौत के लिए कौन लोग जिम्मेदार है। कोर्ट ने 3 अप्रैल 2023 की न्यायिक जांच रिपोर्ट और उसके आधार पर 8 मई 2023 को दर्ज एफआइआर बरकरार रखने के आदेश दिए।
धार जिला जेल में कैदी भेरू पिता बागदीराम मारू बलात्कार सहित अन्य धाराओं में सजा भुगत रहा था। उसे इंदौर जेल से कारपेंटर के रूप में आइटीआइ प्रशिक्षण के लिए फरवरी 2022 को जिला जेल धार भेजा गया था। 27 फरवरी 2023 को दोपहर 1.45 से 2.30 बजे के बीच जेल में तलाशी के दौरान बंदी अरविंद के पास तंबाकू का पैकेट मिला था। उसने तंबाकू भेरू से लेने की बात कही। जांच रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद भेरू की तलाशी दल के सदस्यों ने पिटाई की। हालत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां रात 8 बजे डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। जेएमएफसी ने रिपोर्ट में जेल प्रहरियों ओंकार चौहान, जेलर श्याम वर्मा, अब्दुल रज्जाक खान और मुकेश सोलंकी पर भेरू को गंभीर रूप से पीटने की बात दर्ज की।
कोर्ट ने जांच रिपोर्ट के उस हिस्से को महत्वपूर्ण माना, जिसमें बंदी नितिन के बयान के आधार पर जेल अधीक्षक राजाराम डांगी सहित अन्य पर गैरइरादतन हत्या का केस दर्ज करने के लिए निर्देश दिए गए थे। हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि न्यायिक मजिस्ट्रेट ने वैधानिक सीमा नहीं लांधी। जांच रिपोर्ट में कोई कानूनी त्रुटि, अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन या विकृति नहीं है। एफआइआर हिरासत में हिंसा और साक्ष्य से छेड़खानी के निष्कर्षों पर आधारित है और ऐसी जांच को रोका नहीं जा सकता। कोर्ट ने निष्पक्ष और शीघ्र जांच करने के निर्देश दिए।